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जलने से पहले ही बुझी नगर निगम की एलईडी 

Sun, 24 Jul 2016 12:46 AM IST
राजीव रंजन, अमर उजाला, गोरखपुर।
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स्ट्रीट लाइट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहर के हैलोजन और सोडियम स्ट्रीट लाइटों को एलईडी में तब्दील करने की नगर निगम की योजना की हवा निकल गई है। फायदे का सौदा न मानते हुए इस काम में लगी दोनों ही कंपनियों ने हाथ खींच लिया है। अब नगर निगम शासन स्तर पर अपनी इस योजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी में जुट गया है।
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शहर में तकरीबन 35 हजार स्ट्रीट लाइट प्वाइंट हैं। इनमें से कई 70 वाट की हैं, बाकी 250 वाट की। इसके चलते तकरीबन 53 लाख वाट बिजली की खपत होती है, जिसके लिए नगर निगम को हर माह करीब 30 से 31 लाख रुपये बिल अदा करता पड़ता है। खपत ही नहीं 24 घंटे जलने की वजह से काफी बिजली बर्बाद भी होती है। इन सब चीजों का आंकलन करने के बाद नगर निगम ने स्ट्रीट लाइटों को एलईडी में बदलने का निर्णय लिया था, लेकिन कंपनियों के काम खींचने की वजह से निगम की ‘एलईडी’ जलने के पहले ही बुझ गई।

कंपनियों को रास नहीं आ रहा गोरखपुर
योजना के मुताबिक कंपनी को खुद अपने खर्चे पर ही एलईडी सेट को बदलना है। इसके बाद बिजली की बचत से जो रकम बचेगी, वही कंपनी का लाभ होगा। इसके लिए कुछ समय सीमा निर्धारित है। लेकिन कंपनियों के प्रतिनिधियों के अनुसार उनके लिए यह तभी फायदेमंद है जब स्ट्रीट लाइट प्वाइंट की संख्या ज्यादा हो। नगर निगम के आंकड़े के अनुसार इनकी संख्या 35 हजार है। हालांकि निगम के ही कुछ अन्य अधिकारियों के मुताबिक शहर में स्ट्रीट लाइटों की संख्या तकरीबन 40 हजार है।
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एलईडी लगी तो बचेगी 26 लाख वाट यूनिट बिजली 
अभी शहर में 70 वाट के तकरीबन 30 हजार और 250 वाट के 5000 हैलोजन लगे हुए हैं। अनुमानत: इनसे तकरीबन 53 लाख वाट बिजली की खपत होती है। अगर इनको एलईडी में बदल दिया जाए तो यह खपत कम होकर मात्र 27 लाख रह जाएगी। इससे तकरीबन 26 लाख वाट बिजली बचेगी।

'कंपनियों ने फिलहाल स्ट्रीट लाइटों को एलईडी में बदलने की योजना से हाथ खींच लिया है। ऐसे में शासन को अपने स्तर से कंपनियों को तय करने को लिखा जाएगा।'
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- रबीश चंद्र, पथ प्रकाश प्रभारी एवं मुख्य कर निर्धारण अधिकारी
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