खरमास 16 दिसंबर से लग रहा है, जो 15 जनवरी तक रहेगा। इस बीच एक महीने तक कोई भी शुभ कार्य नहीं होंगे। हालांकि भगवत आराधना की दृष्टिकोण से यह मास उत्तम होता है। आचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि 16 दिसंबर को सूर्य वृश्चिक का परित्याग कर रात्रि में 12 बजकर 10 मिनट पर धनु राशि में प्रवेश कर जाएगा।
लगभग एक महीने तक ये इसी राशि में रहेंगे। पुन: 15 जनवरी को सुबह इस राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस तरह एक महीने तक धनुर्मास (खरमास) रहेगा। शुभ कार्यों में प्रयुक्त तीन ग्रह, सूर्य, चंद्र और बृहस्पति में से एक का बल क्षीण हो जाता है। इसलिए शुभ कार्य नहीं होते हैं, लेकिन इस महीने का अधिपति बृहस्पति होने से भगवत भक्ति के लिए सर्वोत्तम महीने के रूप में मान्य है।
धनुर्मास माहात्म्य
दक्षिण भारत और उत्तरी भारत के अनेक मंदिरों में धनुर्मास (खरमास) का उत्सव मनाया जाता है। यह षौष मास के नाम से जाना जाता है। पौष कृष्ण अष्टमी को श्राद्ध करके ब्राह्मण भोजन कराने से उत्तम फल मिलता है। पौष कृष्ण एकादशी को उपवासपूर्वक भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए। यह सफला एकादशी कहलाती है। इस व्रत को करने से सभी कार्य सफल हो जाते हैं । पौषमास की कृष्ण द्वादशी को सुरूपा द्वादशी का व्रत होता है।