फर्जी शस्त्र लाइसेंस में पुलिस ने प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर खोराबार के एक सेवानिवृत्त शिक्षक, आबकारी पुलिसकर्मी समेत जिन 10 लोगों को छह अक्तूबर को जेल भेज दिया था, उन्हें प्रशासन से क्लीन चिट मिलने के बाद अब पुलिस और प्रशासन की पत्रावलियों की भी जांच पूरी हो गई है।
शुक्रवार को पुलिस और प्रशासन की रिपोर्ट आ सकती है। पत्रावलियां सही पाए जाने पर पुलिस मुकदमे में तत्काल एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगाकर केस बंद कर देगी और गलत सूची देने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं अगर पत्रावली में छेड़छाड़ मिली तो मुकदमे में धाराएं बढ़ाई जाएंगी।
फर्जी शस्त्र लाइसेंस के मामले में असलहा कार्यालय के तरफ से पुलिस को सूची सौंपी गई थी। जिसके आधार पर पुलिस ने शिक्षक, आबकारी सिपाही समेत दस लोगों को आर्म्स एक्ट में जेल भेज दिया था।
जमानत पर छूटने के बाद दसों लोगों ने असलहा कार्यालय से मूल पत्रावली की नकल निकलवाकर विवेचक शैलेंद्र शर्मा को सौंपी थी। विवेचक ने उन पत्रावलियों को जांच के लिए असलहा कार्यालय और अपने विभाग को भेजा था। सूत्रों की मानें तो अब वह जांच पूरी हो गई है। शुक्रवार को जांच रिपोर्ट विवेचक को मिल जाएगी।
पुलिस ने इन्हें भेजा था जेल
पुलिस ने खोराबार के कुईं बाजार निवासी विनोद कुमार, जर्दा गांव के भैंसहा टोला निवासी जगदीश शुक्ला, जंगलसिकरी निवासी मोहम्मद बिन कासिम, छपरा गांव निवासी रामहित यादव, मिर्जापुर निवासी राम आशीष, जंगल रामलखना निवासी विजय प्रताप सिंह, जंगल चौरी टोला शेख निवासी महताब आलम, रायगंज बाजार निवासी राम चन्द्र, नवां अव्वल निवासी राम नयन और राम निवास यादव निवासी जंगलचंवरी का लाइसेंस फर्जी करार देकर अवैध हथियार रखने के आरोप में जेल भेजा था।