नगर निगम के कामों की जांच शुरू होने के साथ ही संबंधित कामों से जुड़े अफसरों की सिफारिशें भी शुरू हो गई हैं। कोई पार्षद तो कोई ठेकेदार को दबंग बताकर अपना कंधा इस्तेमाल होने का तर्क दे रहा है। कमिश्नर के निर्देश पर निगम के सभी वार्डों के 88 बड़े काम जो जांच की जद में हैं, उनकी जांच पखवारे भर में हो जाने की उम्मीद है। उधर, कमिश्नर ने भी दो टूक शब्दों में कह दिया है कि अगर गड़बड़ी मिली तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई तय है। जिन भी अफसरों की संलिप्तता पाई गई, वे वर्तमान में यहां तैनात हो या नहीं, उनके बारे में शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
कमिश्नर ने पहले पिछले तीन सालों के सभी कामों की जांच के निर्देश दिए थे, मगर इनकी संख्या 1200 से अधिक पहुंचने पर तय हुआ कि सभी वार्डों के बड़े कामों की जांच होगी। इसके बाद कामों को छांटा गया और उनमें से जांच के लिए 88 काम चिह्नित किए गए। काफी जद्दोजहद के बाद कामों से जुड़े रिकार्ड हासिल करने के बाद अब टीम ने जांच शुरू कर दी है। टीम सबसे पहले यह जांच रही हैं कि संबंधित काम मौके पर हुए भी हैं या नहीं। इसके बाद उसकी गुणवत्ता जांची जा रही है।
बताया जा रहा है कि निगम में बड़े पैमाने पर ऐसे खेल हुए हैं कि मौके पर काम हुआ ही नहीं और इस्टीमेट बनाकर रुपये की बंदरबांट हो गई। इसी तरह कई ऐसी सड़कें हैं जो निर्माण के साल भीतर ही उखड़ने लगीं हैं।