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खुदा से मांगी मुल्क के अमन-चैन और तरक्की की दुआ

Fri, 01 Jul 2016 07:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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घंटाघर बड़ी मस्जिद में अलविदा की नमाज पढते रोजेदार। - फोटो : rajesh kumar
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पाक और मुकद्दस रमजान के जाने का गम, लबों पर मुल्क की बेहतरी की दुआ। रमजान के आखिरी जुमा यानी अलविदा की नमाज पर हर मस्जिद का यही नजारा था। शहर की सभी मस्जिदों में रोजेदार अलविदा की नमाज के लिए पहुंचे। सुन्नतें और सलातुल तस्बीह पढ़ी। फिर कुरान की तिलावत की। खुदा से माह-ए-रमजान फिर आने की इल्तिजा की। साथ ही मुल्क के अमन-चैन और तरक्की की दुआ भी की।
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घरों में शुक्रवार की सुबह से ही अलविदा की नमाज की तैयारी शुरू हो गई थी। मस्जिद प्रबंधन भी नमाजियों की अधिक तादाद के मद्देनजर तैयारियों में जुट गया था। बच्चे, बूढ़े और युवा सभी ने गुस्ल किया। नहा-धोकर नए और साफ-सुथरे कपड़े पहने। टोपी लगाई और बढ़ चले मस्जिदों की ओर। अजान तक मस्जिदें भर गईं। बहुत से लोगों ने मस्जिदों के बाहर सड़कों पर इबादत की।

यह नजारा मुबारक खां शहीद, मदीना मस्जिद, शाही जामा मस्जिद, उर्दू बाजार, जामा मस्जिद रसूलपुर, शाह मारूफ, रायगंज, मोहल्ला धमाल में नजर आया। इबादत का सिलसिला जब शुरू हुआ तो लोगों ने गुनाहों की मांफी मांगी और मुकद्दस रमजान महीने के आखिरी जुमे की नमाज अदा की।
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महिलाओं ने घरों में अपनी इबादत पूरी की। जमातुल विदा के मौके पर ईद जैसा माहौल नजर आया। नमाज से पहले जुमातुल विदा का खुतबा पढ़ा गया। इस दौरान प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। कैमरों से मस्जिदों की निगरानी की गई।  बयां किए गए रमजान के फजायल अलविदा की नमाज के बाद मस्जिदों में रमजान के फजायल बयान किए गए। रमजान के जाने का दर्द बयां किया गया। जामा मस्जिद रहमतनगर के इमाम मौलाना अली अहमद शाद बस्तवी ने तकरीर में रमजान के फजाइल बयान किए। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना रहमत व बरकत से मामूर है। इसकी हर घड़ी रहमत से सराबोर है। रमजान रुखसत होने वाला है। हमें चाहिए कि बचे दिनों में खुदा की इबादत कर अपने गुनाहों की माफी मांग लें। नमाज के बाद खुशूसी सलाम पेश किया गया अलविदा-अलविदा माहे रमजान अलविदा। इसके बाद मिलाद पढ़ी गई।

गाजी मस्जिद गाजी रौजा में मुफ्ती अख्तर हुसैन ने आपसी भाईचारा को कायम रखने फित्र व जकात निकालने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रमजान की बची रातों में इबादत कर दुआएं मंागें और गुनाहों से तौबा करें। मस्जिद खादिम हुसैन तिवारीपुर के मौलाना अफजल बरकाती, दारोगा खां मस्जिद में कारी हिदायतुल्लाह, जामा मस्जिद उर्दू बाजार में इमाम मौलाना अब्दुल जलील मजहरी ने जकात व फित्र पर रोशनी डाली।
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