गोरखपुर आयकर विभाग ने विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट पवन कुमार तिवारी के खिलाफ जारी नोटिस को गलत बताते हुए वापस ले लिया है। विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर सर्किल सेकंड अजय कुमार चौधरी ने 25 नवंबर को इस बाबत ऑफिस नोट जारी किया है।
ऑफिस नोट में कहा गया है कि बांसगांव तहसील के सब रजिस्ट्रार ने जो डाटा अपलोड किया था, उसके मुताबिक पवन कुमार तिवारी लघु वाद न्यायाधीश ने बंदना सेवा संस्थान को जमीन विक्रय किया। अपलोड डाटा के आधार पर उन्हें नोटिस जारी की गई थी। नोटिस गलत तथ्यों पर जारी हो गई थी, जिसकी प्रोसिडिंग ड्रॉप की जाती है।
दरअसल पवन कुमार तिवारी वर्ष 2010 में गोरखपुर में बतौर लघु वाद न्यायाधीश कार्यरत थे। उन्होंने बंदना सेवा संस्थान के जानकी मिश्रा बनाम रामवृक्ष वगैरह के मुकदमे में फैसला सुनाया था। फैसले में तीन माह के भीतर विपक्षी रामवृक्ष आदि को निर्देशित किया गया था कि वे बंदना सेवा संस्थान को बैनामा कर दें, लेकिन रामवृक्ष आदि ने बैनामा नहीं किया।
इसके बाद 2012 में उन्होंने एक और फैसला सुनाया, जिसमें कार्यालय लिपिक निर्भय कुमार मिश्र को रजिस्ट्री करने के लिए अधिकृत किया गया। 30 मार्च 2012 को कार्यालय लिपिक निर्भय कुमार मिश्र ने न्यायालय के आदेश पर रामवृक्ष आदि की तरफ से बंदना सेवा संस्थान को बांसगांव तहसील के सब रजिस्ट्रार के यहां बैनामा कर दिया । बैनामे के आधार पर इनकम टैक्स विभाग ने न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी को नोटिस जारी किया।