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50 हजार में तैयार करते थे फर्जी दस्तावेज

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50 हजार में तैयार करते थे प्रमाण पत्र
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देवरिया। एसटीएफ के हत्थे चढ़े फर्जी शिक्षकों ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जाली प्रमाण पत्रों के आधार पर दर्जनों लोगों को नौकरी दिलाए जाने की बात स्वीकार की। यह शिक्षक बलिया, देवरिया और सिद्धार्थनगर जिलों में तैनात हैं। खास बात यह कि नौकरी के लिए जाली प्रमाण पत्र भी यह खुद तैयार करते थे और बीएसए कार्यालय के बाबू की मिलीभगत से उसका सत्यापन भी स्वयं कर देते थे। इन जानकारियों के आधार पर एसटीएफ अन्य शिक्षकों व बाबूओं पर शिकंजा कसने में जुट गई है। एसटीएफ के मुताबिक एक फर्जी डिग्री 50 हजार में बनाई जाती थी।
दानोपुर गांव के पास से पकड़े गए अश्वनी श्रीवास्तव के पास से तलाशी में मोनाड यूनिवर्सिटी हापुड़ का मुहर भी मिली। उसने बताया कि इस यूनिवर्सिटी का विज्ञापन कुछ वर्षों पूर्व अखबारों में निकला था। बातचीत के बाद अंकपत्र घर आ गया। विश्वास बना तो फिर जयपुर के रहने वाले विजय कुमार से बात कर वह बीएड की डिग्री व अन्य दस्तावेज मंगाता था। विजय नार्थ ईस्ट यूनिवर्सिटी अरुणाचल प्रदेश, मोनाड यूनिवर्सिटी हापुड़, एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा, जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी की डिग्री उपलब्ध कराता था। कोरियर से डिग्री घर आती थी या फिर से ईमेल के जरिए मंगाकर प्रिंट कर लिया जाता था। देवरिया के आठ शिक्षकों के सत्यापन के लिए मोनाड यूनिवर्सिटी की मुहर अपने पास रखी था। इसके लिए उसने वेरीफिकेशन डिस्पैच बाबू जयशंकर श्रीवास्तव और प्रीतम से सेटिंग की थी। सिद्धार्थनगर में दिवाकर बाबू से सेटिंग कर उसने अपने अलावा तीन अन्य शिक्षकों का वेरीफिकेशन कराया था। अश्वनी के पास से बरामद बैग से शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के अलावा कई जाली प्रमाण पत्र भी मिले। मूल प्रमाण पत्र के नाम-पते में संशोधन कर इसे तैयार किया गया था।
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जिले में भी कई शिक्षकों को दिलाई नौकरी
दोनों जालसाजों ने फर्जी दस्तावेजों से जिले में कई शिक्षकों के तैनाती की जानकारी दी। इनमें दो शिक्षक भाटपाररानी ब्लॉक, एक बरहज और एक गौरीबाजार ब्लाक में नियुक्त हुआ था। इसके अलावा सिद्धार्थनगर जिले में तैनात चार अन्य शिक्षकों का भी नाम बताया जिनके बीएड व शिक्षक पात्रता परीक्षा के प्रमाण पत्र इन्होंने तैयार किया था।
कम दिनों में फर्श से अर्श पर पहुंच गया मुक्ति
मुक्तिनाथ मझौलीराज नगर मूल रूप से निवासी है। दानोपुर में मकान बनवाकर रहताथा। मझौलीराज में गणपति प्रसाद इंटर कॉलेज का प्रबंधक भी है। आर्थिक रूप से मुक्ति कमजोर था, लेकिन जालसाजी के कारण बहुत कम दिनों में फर्श से अर्श पर पहुंचा था।
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पहले करता था ठेकेदारी अश्वनी
अश्वनी श्रीवास्तव पहले बिजली निगम में ठेकादारी करता था। फर्जी नौकरी दिलाने वाले सरगना राकेश सिंह से उसका संपर्क हुआ। 2011 में टेट का परीक्षा दी, अंक कम था। अश्वनी ने बताया कि सलेमपुर में एक गोरखपुर का नीतिन श्रीवास्तव रहता था, उसने ही टेट का नंबर बढ़ाकर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किया था।
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