चार दिनों से पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस व उसके इलाज की स्थिति का जायजा लेने पहुंची मानवाधिकार की टीम ने बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज का दौरा किया। यहां टीम ने मरीजों की केस हिस्ट्री जानी तो जांच और इलाज को लेकर कॉलेज प्रशासन से गहन पूछताछ भी की। चार घंटे चली पड़ताल में टीम के सदस्यों ने इंसेफेलाइटिस के तीनों वार्डों में जाकर भर्ती मरीजों से भी बातचीत की।
तय कार्यक्रम के तहत ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विनय गोयल के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम कॉलेज पहुंची। टीम के सदस्यों ने प्राचार्य कक्ष में आधे घंटे तक कॉलेज प्रशासन द्वारा जुटाए गए इंसेफेलाइटिस के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसके बाद शुरू हुआ मौका मुआयना का सिलसिला। इसकी शुरुआत एपेडेमिक वार्ड के पैथोलॉजी सेंटर से हुई। टीम ने जहां इंसेफेलाइटिस की पुष्टि के लिए होने वाली सीएसएफ जांच को लेकर पूछताछ की और सुझाव दिया कि वहीं लैब टेक्निशियनों की तादाद बढ़ाकर जांच रिपोर्ट मिलने की अवधि को कम किया जा सकता है। इसके बाद टीम एपेडेमिक वार्ड नंबर 12 का मुआयना करते हुए 100 बेड इंसेफेलाइटिस वार्ड में पहुंची। वहां आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों से बीमारी की वजह और कॉलेज में इलाज के इंतजाम पर बातचीत की और उसे रिकार्ड में दर्ज किया।
यहां टीम ने इंसेफेलाइटिस वार्ड छह, 12 और 100 बेड के बीच एक अल्ट्रासाउंड मशीन पर आपत्ति जताई। कहा कि हर वार्ड में कम से कम एक मशीन तो होनी ही चाहिए। कई मरीजों की बीएचटी पर मेंजाइटिस व एईएस दोनों रोग दर्ज होने पर टीम ने जब आपत्ति जताई तो कॉलेज के डॉक्टरों ने उन्हें साफ किया कि मरीज में एईएस के भी लक्षण हैं। ऐसे में लगातार निगरानी रखी जा रही है। टीम ने इंसेफेलाइटिस से विकलांग हुए मरीजों के पुनर्वास के लिए कॉलेज में बनाए गए केंद्र का भी जायजा लिया और वहां इंतजाम को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। मुआयने के दौरान कॉलेज के डॉक्टर माहिम मित्तल, डॉ. पवन सिंह, डॉ. महिमा मित्तल, डॉ. भूपेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे।