देश की पहली हमसफर ट्रेन चलाने में बेडरोल (चादर, कंबल, तकिया, तौलिया) की समस्या आड़े आने लगी है। जरूरत के मुताबिक गोरखपुर मैकेनाइज्ड लांड्री में बेडरोल ही नहीं है। पूर्वोत्तर रेलवे के तीनों मंडलों में जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त बेडरोल न मिलने पर अब महकमे के अधिकारियों ने दूसरे जोन से संपर्क साधा है।
हमसफर एक्सप्रेस की सभी 20 बोगियां वातानुकूलित रहेंगी। इस हिसाब से इन बोगियों में करीब 3000 चादर, 2000 कंबल और इतने ही तकिये की जरूरत होगी, जबकि मैकेनाइज्ड लांड्री में इतना बेडरोल नहीं है। वहीं अक्टूबर से स्पेशल और सुविधा ट्रेनें भी चलने लगेंगी, ऐसे में उन्हीं के लिए बेडरोल का इंतजाम कर पाना आसान नहीं होगा। नये बेडरोल की खरीद में कम से कम दो से तीन महीने का समय लगेगा। मुश्किल यहीं खत्म होती नहीं दिख रही, अगर बेडरोल का इंतजाम हो भी जाता है तो उनकी धुलाई कर पाना संभव नहीं होगा। इसके लिए नई मशीन की जरूरत होगी।
पूर्वोत्तर रेलवे के वरिष्ठ कोचिंग डिपो अधिकारी डीबी तिवारी का कहना है कि स्पेशल ट्रेनों के साथ ही हमसफर के लिए बेडरोल का इंतजाम करने में दिक्कत आ रही है। इसके लिए दूसरे जोन से भी सहयोग मांगा गया है। धुलाई में दिक्कत नहीं आएगी, क्योंकि जल्द ही मैकेनाइज्ड लांड्री में एक और मशीन आ जाएगी।
45 सौ पैकेट है धुलाई की क्षमता
मैकेनाइज्ड लांड्री में बेडरोल की धुलाई की क्षमता रोजाना 45 सौ पैकेट की है। एक पैकेट में एक सेट बेडरोल रहता है, जबकि गोरखपुर से 14 ट्रेनों में बेडरोल की सप्लाई की जाती है।
इन ट्रेनों में है बेडरोल की सप्लाई
दादर एक्सप्रेस, राप्तीसागर एक्सप्रेस, मौर्या एक्सप्रेस, गोरखधाम एक्सप्रेस, चौरीचौरा एक्सप्रेस, शालीमार एक्सप्रेस, अमरनाथ एक्सप्रेस, देहरादून एक्सप्रेस, गोरखपुर-एलटीटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस, गोरखपुर-पुणे एक्सप्रेस।