जिले में कम बारिश के चलते फसलों पर बुरा असर पड़ सकता है। जून से लेकर 25 अगस्त तक जिले में औसत से 37 प्रतिशत कम बरसात हुई है। मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक तीन-चार दिनों तक बारिश की संभावना बेहद कम है। पुरवा हवाएं चलेंगी और उमस भरी गर्मी के बीच कहीं-कहीं बूंदाबादी हो सकती है।
प्रदेश के कई जिले बरसात और बाढ़ की तबाही का दंश झेल रहे हैं। भारी बारिश की वजह से नदियों का जलस्तर इतना बढ़ गया कि कई गांव पानी से घिर गए हैं। वहीं गोरखपुर जनपद की स्थिति बरसात की दृष्टि से ठीक नहीं है। एक जून से 25 जून तक 868 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए, जबकि 25 अगस्त तक मात्र 550 मिलीमीटर ही बरसात हुई। कम बारिश की वजह से खेती-किसानी पर भी खराब असर पड़ सकता है। यही हाल रहा तो अधिक पानी वाली धान की फसलों की पैदावार बिगड़ सकती है।
मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय के मुताबिक अभी तीन दिन तक अच्छी बरसात की कोई संभावना नहीं है। गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में हल्की बूंदाबादी हो सकती है। इस बीच उमस और गर्मी से राहत की भी उम्मीद कम है। पुरवा हवाओं के बीच उमस जारी रहेगी। हां, 29 अगस्त के बाद बारिश के आसार हैं।
सात दिन और नहीं हुई बारिश तो पड़ेगा सूखा
खेतों में खड़ी धान की फसल को नमी की जरूरत है। पिछले दस दिनों से बारिश न होने से धान के खेत चटक रहे हैं। दरारें उभरने लगी हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक अगर और सात दिनों तक बारिश नहीं हुई तो सूखा पड़ना तय है। अनुमान के मुताबिक अब तक 950 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन 362 मिलीमीटर हुई वर्षा हो पाई है।
जिले में एक लाख 60 हजार हेक्टयेर क्षेत्रफल में धान, मक्का, मूंगफली, तिल आदि की बुवाई हुई है। इनमें से सर्वाधिक एक लाख 53 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में केवल धान की फसल लगी है, जिसे नमी की सर्वाधिक जरूरत होती है, लेकिन दस दिनों से पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं हुई। सक्षम किसान अपने निजी साधनों से धान के खेतों की सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन जो सक्षम नहीं हैं, वे आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
जिला कृषि अधिकारी अरविंद चौधरी के अनुसार मक्का, मूंगफली व तिल को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती, अगर बारिश कम भी हो तो इन फसलों के उत्पादन पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता। हां, धान की फसलों को नमी की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस बार औसत से भी कम वर्षा हुई है। अगर यही स्थिति एक सप्ताह तक और बनी रही तो इस सूखा पड़ना तय है।