फर्जी एनओसी पर मान्यता हासिल करने के प्रकरण में फंसे 29 कॉलेजों को हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। गोरखपुर यूनिवर्सिटी की अपील पर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने प्रकरण के दोषी इनमें से एक विवेकानंद पीजी कॉलेज को संबद्धता देने के मामले को खारिज कर दिया है। इसी फैसले के आधार पर यूनिवर्सिटी सभी 29 कॉलेजों के भविष्य पर निर्णय लेने की तैयारी में जुट गया है। जाहिर है कि यह निर्णय कॉलेजों के पक्ष में नहीं होगा।
हाईकोर्ट इलाहाबाद की डबल बेंच ने निर्णय देते हुए साफ किया है कि कॉलेजों ने संबद्धता नियमों का पालन नहीं किया है, ऐसे में उन्हें इस सत्र में संबद्धता नहीं दी जा सकती। इससे पहले तीन जून को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने स्वामी विवेकानंद कॉलेज की याचिका पर फैसला देते हुए राज्य सरकार और गोरखपुर यूनिवर्सिटी को यह निर्देश दिया था कि इस कॉलेज को सत्र 2016-18 की बीएड काउंसिलिंग में शामिल किया जाए। विवेकानंद कॉलेज की सफलता को देखते हुए दो दर्जन और कॉलेजों ने हाईकोर्ट की शरण ली और ऐसा ही निर्देश हासिल किया। एकल पीठ के निर्णय के खिलाफ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील की।
हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा कि चूंकि कॉलेजों को यूनिवर्सिटी ने संबद्धता ही नहीं दी है, ऐसे मेें उन्हें बीएड काउंसिलिंग में शामिल होने का अवसर देना नियमानुसार संभव नहीं है। यूनिवर्सिटी की अपील पर हाईकोर्ट ने 25 जुलाई को फैसला सुना दिया।
यह था फर्जी एनओसी प्रकरण
फर्जी एनओसी से बीएड मान्यता हासिल करने के मामले को छह महीने पहले कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने पकड़ा था। यूनिवर्सिटी की गहन जांच में 40 कॉलेज इस प्रकरण के दोषी पाए गए थे। जब एनसीटीई से जांच कराई गई तो 11 कॉलेज दोषमुक्त कर दिए गए और 29 को दोषी करार दिया गया। हालांकि यूनिवर्सिटी ने सभी 40 कॉलेजों को दोषी मानते हुए संबद्धता देने से मना कर दिया था। इसके विरोध में कॉलेजों ने हाईकोर्ट की शरण ली और एकल बेंच से अपने पक्ष में निर्णय हासिल किया था। इससे दुविधा में पड़े यूनिवर्सिटी प्रशासन ने डबल बेंच में अपील की थी।