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फर्जी शस्त्र लाइसेंस: शिक्षक और आबकारी पुलिसकर्मी समेत 10 बेगुनाहों को भेज दिया था जेल

Sun, 24 Nov 2019 02:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अरुण चन्द/शिवम सिंह, गोरखपुर
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : डेमो
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फर्जी शस्त्र लाइसेंस में पुलिस ने प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर खोराबार के एक सेवानिवृत्त शिक्षक, आबकारी पुलिसकर्मी समेत जिन 10 लोगों को छह अक्टूबर को जेल भेज दिया था, वे सबके सब बेगुनाह निकले।

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जिला प्रशासन को अब इनके शस्त्र से संबंधित सभी मूल दस्तावेज मिल गए हैं और उसने आरोपितों को क्लीनचिट भी दे दिया है। बेगुनाहों को जेल भेजने के आरोप से बचने के लिए अब जिला प्रशासन और पुलिस इस गड़बड़ी के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि इन बेगुनाहों ने जेल जाने, सामाजिक प्रतिष्ठा चौपट होने की जो यातना झेली, उसका हिसाब कौन देगा ?

इस मामले में की गई कार्रवाई के दस्तावेज के मुताबिक खोराबार कुई बाजार निवासी विनोद कुमार, जर्दा गांव के भैंसहा टोला निवासी जगदीश शुक्ला, जंगलसिकरी निवासी मोहम्मद बिन कासिम , छपरा गांव निवासी रामहित यादव, मिर्जापुर निवासी राम आशीष, जंगल रामलखना निवासी विजय प्रताप सिंह, जंगल चौरी टोला शेख निवासी महताब आलम, रायगंज बाजार निवासी राम चन्द्र, नवां अव्वल निवासी राम नयन और राम निवास यादव निवासी जंगलचौरी को फर्जी शस्त्र लाइसेंस के आधार पर हथियार रखने के आरोप में जेल भेजा गया था।
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इनमें से रामहित यादव, रामअशीष और जगदीश शुक्ला को छोड़कर बाकी सात लोगों को जिला प्रशासन की तरफ से कलेक्ट्रेट में मौजूद शस्त्र लाइसेंस की मूल पत्रावली की सत्यापित नकल भी दी जा चुकी है। कुछ के मामले में एडीएम (सिटी) राकेश कुमार श्रीवास्तव ने खोराबार थानाध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा भी है कि संबंधित के शस्त्र लाइसेंस से जुड़े प्रमाणित अभिलेख कलेक्ट्रेट से मिल गए हैं, इनके शस्त्र लाइसेंस कलेक्ट्रेट से जारी हुए हैं। ऐसे में उक्त साक्ष्य के आधार पर विवेचना जल्द पूरी कर संबंधित न्यायालयों में रिपोर्ट दे दी जाए।

अब एक दूसरे पर उठा रहे सवाल
खोराबार के 10 लोगों के शस्त्र लाइसेंस फर्जी बताकर उन्हें जेल भेज देने के मामले में अब पुलिस और प्रशासन के बोल बदल गए हैं। दोनों एक-दूसरे पर ही सवाल उठा रहे। जिला प्रशासन का कहना है कि उनकी मजिस्ट्रेटी जांच पूरी होने के पहले ही पुलिस ने संबंधित लोगों को जेल भेज दिया। वहीं पुलिस का कहना है कि जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर उन्होंने कार्रवाई की।

खोराबार में एक साथ जिन दस लोगों को जेल भेजा गया उन सभी के शस्त्र लाइसेंस से जुड़े मूल दस्तावेज मिल गए हैं। सभी के लाइसेंस वैध हैं। उन्हें मूल दस्तावेजों की सत्यापित नकल भी जारी कर दी गई है, ताकि वे विवेचना में साक्ष्य प्रस्तुत कर अपनी बेगुनाही साबित कर सकें। पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की। जब ये लोग जेल भेजे गए उसके काफी बाद जिला प्रशासन की मजिस्ट्रेटी जांच पूरी हुई।
- राकेश कुमार श्रीवास्तव, एडीएम (सिटी) व मजिस्ट्रेटी जांच कमेटी के सदस्य

जिला प्रशासन के लिखित रिपोर्ट के आधार पर ही खोराबार थाना क्षेत्र के 10 लोगों पर एक साथ कार्रवाई की थी। मामले की जांच जारी है। प्रशासन की तरफ से इस मामले में कुछ नई जानकारी दी गई है जिसे डीएम के माध्यम से सत्यापित कराया जा रहा है।
- सुमित शुक्ला, सीओ कैंट व एसआईटी प्रभारी

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आबकारी सिपाही पर कार्रवाई ने पहले ही खड़े किए सवाल

फर्जी लाइसेंस के मामले में जिस आबकारी सिपाही विजय प्रताप सिंह को खोराबार पुलिस ने छह अक्तूबर 2019 को जेल भेज दिया था, उनके दोनों शस्त्र लाइसेंस को निरस्त करने की सिफ ारिश पुलिस पहले भी कर चुकी थी। तत्कालीन एसएसपी की संस्तुति पर जिला मजिस्ट्रेट डॉ. हरिओम (वर्तमान में प्रमुख सचिव) ने लाइसेंस को पहले निलंबित किया मगर फि र बहाल भी कर दिया।

विजय के दोनों लाइसेंस के मामले में अलग-अलग समय में जिला- पुलिस प्रशासन की दो रिपोर्ट डेढ़ महीने से चर्चा में है। प्रधानी के चुनाव में हुई एक घटना के बाद तत्कालीन खोराबार थानाध्यक्ष ने चार सितंबर 2005 को एसएसपी को पत्र लिखकर कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए खोराबार ब्लॉक के जंगल रामलखना निवासी विजय प्रताप सिंह के दो नाली बंदूक (लाइसेंस संख्या 4830) और रिवाल्वर (लाइसेंस संख्या 3291) का लाइसेंस निरस्त करने की सिफ ारिश की थी।

इसपर एसएसपी ने तत्कालीन डीएम डॉ. हरिओम को संस्तुति कर दी । डीएम ने आयुध अधिनियम 17 (3) के तहत विजय को नोटिस भेज दोनों शस्त्र लाइसेंस जमा करने का निर्देश दिया था। बाद में उन्हीं की कोर्ट ने 19 जनवरी 2006 को दोनों लाइसेंस बहाल कर दिए।

मुख्यमंत्री व नोडल मंत्री से भी हुई थी शिकायत
इस मामले में पंचायत प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिले के नोडल मंत्री रमापति शास्त्री से शिकायत की थी। मुख्यमंत्री व नोडल मंत्री दोनों ने मामले की जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था।

सस्पेंड हो गया था आबकारी सिपाही
फर्जी लाइसेंस के आरोप में जेल भेजे जाने के मामले में आबकारी सिपाही को निलंबित कर दिया गया था। उसके पास मौजूद रिवाल्वर और रॉयफल के लाइसेंस का मिलान कलेक्ट्रेट के मूल अभिलेखों से नहीं होने पर पुलिस ने उसे फर्जी मानकर जेल भेज दिया था। बाद में जांच पड़ताल में दोनों असलहों के मूल दस्तावेजों की सत्यापित कॉपी मिलने पर उसे बहाल किया गया।
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