मजिस्ट्रेटी जांच पूरी, अब चालान और सेल्स रिकार्ड की होगी जांच
गोरखपुर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस के सनसनीखेज मामले की 16 अगस्त से चल रही मजिस्ट्रेटी जांच नौ सितंबर की देर रात पूरी हो गई। जांच कर रही कमेटी ने डीएम को अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी है। 26 दिन तक चली मजिस्ट्रेटी जांच में सिस्टम में हुई गड़बड़ी सामने आने के साथ ही सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा असलहा बाबू राम सिंह, पूर्व असलहा बाबू अशोक गुप्ता और विजय श्रीवास्तव के समय ही पाया गया है।
राम सिंह और अशोक गुप्ता ने शस्त्र अनुभाग के अभिलेखों में हेराफेरी कर फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने वाले गिरोह की मदद की तो विजय श्रीवास्तव ने अभिलेख में हेराफेरी कर खुद अपने ही नाम शस्त्र लाइसेंस जारी कर लिया। उनके कार्यकाल के दौरान कई और फर्जीवाड़ा पाया गया है। पुलिस को उनकी तलाश है। उधर, चार गन हाउस के रिकार्ड में भी गड़बड़ी मिली है, उन्हें नोटिस भेजकर जवाब मांगा जाएगा। इसी तरह कुछ लाइसेंस का भी शस्त्र अनुभाग में रिकार्ड नहीं मिल रहा है। उन्हें भी जल्द ही नोटिस भेजकर दस्तावेज के सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रथमेश कुमार ने बताया कि मजिस्ट्रेटी जांच तो पूरी हो गई मगर अब दूसरे चरण की जांच शुरू होगी। इसमें लाइसेंस नवीनीकरण के लिए जमा किए जाने वाले चालान और सरकारी खजाने में जमा रकम से मिलान कराया जाएगा। जिला प्रशासन को संदेह है कि इसमें भी गोलमाल हो सकता है। अमर उजाला ने सोमवार के अंक में इसे प्रमुखता से उठाया भी है। कुछ चालानों के सत्यापन में पाया गया कि चालान पर जितनी राशि दर्ज है उतनी कोषागार के खजाने में पहुंची ही नहीं। इसी तरह कई चालान पर नंबर ही नहीं पड़े हैं। इसी तरह सभी गन हाउस के सेल्स रिकार्ड में कारतूस आदि की बिक्री भी जांची जाएगी।
कोट :
मजिस्ट्रेटी जांच पूरी हो गई है। रिपोर्ट मुझे मिल गई है। असलहा बाबू राम सिंह, अशोक गुप्ता के अलावा विजय श्रीवास्तव के ही कार्यकाल में ज्यादातर गड़बड़ियां पाई गई हैं। चार शस्त्र दुकानों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। नोटिस भेजकर उनसे जवाब तलब किया जाएगा। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। कुछ लाइसेेंस का भी मिलान नहीं हो पा रहा है, नोटिस भेजकर संबंधित को लाइसेंस के सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा। इसके अलावा अब चालान और कारतूस आदि की बिक्री भी जांची जाएगी।
- के. विजयेंद्र पांडियन, डीएम