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खुद के जाल में उलझी पुलिस तो सौरभ को परिवारवालों को सौंपा

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खुद के जाल में उलझी पुलिस तो सौरभ को परिवारवालों को सौंपा
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गोरखपुर। फर्जी लाइसेंस प्रकरण में आरोपी बनाए गए सौरभ पांडेय के मामले में पुलिस पूरी तरह से उलझ गई। असलहा, लाइसेंस बरामद नहीं कर पाने के बीच ही नाटकीय ढंग से सौरभ को फरार बता दिया गया। कैंट थाने में केस भी दर्ज किया गया। इसी बीच फिर उसको बुधवार को पकड़े जाने की जानकारी सार्वजनिक की गई और अब घरवालों के हवाले कर दिया गया। मगर सबसे बड़ा सवाल यह कि यदि उसके पास से लाइसेंस और असलहा बरामद नहीं हुआ तो भी वह फरार होने का आरोपी था फिर एक आरोपी को थाने से कैसे छोड़ दिया गया?
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फर्जी लाइसेंस प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी ने सौरभ पांडेय को पकड़ा था। पुलिस के मुताबिक 24 अगस्त को सौरभ पांडेय के पास फर्जी लाइसेंस के बारे में जानकारी मिली थी। 25 अगस्त को उसे पूछताछ के लिए बुलाया गया था। लाइसेंस बरामद करने के लिए पुलिसकर्मी साथ लेकर उसके ससुराल गए थे, जहां से वह फरार हो गया। तभी से पुलिस की अलग-अलग टीमें उसकी तलाश में लगी थीं। पुलिस ने ही बताया था कि उसे पकड़ लिया गया है। लेकिन अब पुलिस जब इस मामले में फंस गई तो उसका बयान बदल गया है। अब पुलिस का कहना है कि परिवार के लोग खुद ही सौरभ को लेकर थाने आए थे और उसके पास से कोई फर्जी लाइसेंस या असलहा बरामद नहीं हुआ था, इस वजह से ही उसे छोड़ा गया है। हालांकि फरार होने के आरोपी को छोड़े जाने के सवाल पर पुलिस सीधा कुछ भी बोलने से बच रही है। दरअसल, सौरभ पांडेय को फरार बताने वाली पुलिस के लिए यह प्रकरण गले का फांस बन गया है। सौरभ के एक रिश्तेदार सेना में हैं और शौर्य पदक विजेता भी। उनके गृह मंत्रालय में शिकायत के बाद से ही मामला तूल पकड़ा था जिसके बाद पुलिस ने सौरभ को परिवार के हवाले कर दिया। एएसपी बोत्रे रोहन प्रमोद का कहना है कि सौरभ को चेतावनी दी गई है कि वह शहर ना छोड़े और जांच में पुलिस को सहयोग करें।
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