फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

असली दफ्तर से ही बनते थे नकली लाइसेंस

विज्ञापन
विज्ञापन
असली दफ्तर से ही बनते थे नकली लाइसेंस
विज्ञापन

शिवम सिंह
गोरखपुर। ‘असली दफ्तर (कलेक्ट्रेट स्थित असलहा दफ्तर) से ही नकली लाइसेंस बनाने का पूरा खेल संचालित हो रहा था।’ पिछले पंद्रह दिनों से सनसनी फैलाए फर्जी लाइसेंस प्रकरण में रवि गन हाउस के मालिक के बेटे के इस बयान से हड़कंप मच गया है। रवि के बयान और पुलिस की जांच से यह संकेत मिल रहे हैं कि रवि गन हाउस का मालिक लाइसेंस बनवाने का ठेका लेता था तो बिचौलिया गोपी असलहा दफ्तर के कुछ कर्मचारियों की मदद से लाइसेंस बनवाने का काम करता था। प्रारंभिक जांच से यह भी तथ्य सामने आया है कि बाहरी लोग असलहा दफ्तर में बैठते थे। इन सबकी तलाश चल रही है।
असलहा रिकॉर्ड से जुड़े कंप्यूटर ऑपरेटर की मदद से यूनिक आईडी हासिल की जाती थी। पूछताछ में तथ्य सामने आने के बाद पुलिस ने कर्मचारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। पुलिस की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे गड़बड़ी से पर्दा उठता जा रहा है। अभी तक पुलिस का ध्यान फर्जी लाइसेंस बनवाने और खरीदने वालों पर था, लेकिन अब जांच की दिशा बदल गई है। पुलिस का कहना है कि रवि गन हाउस के मालिक प्रकाश नारायण पांडेय के बेटे रवि पांडेय को दबोचने के बाद पुलिस को चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। अब पुलिस कलेक्ट्रेट के कुछ कर्मचारियों की भूमिका की जांच में जुट गई है। इस मामले में रवि पांडेय के बयान को जांच का आधार बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कुछ सरकारी कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध लग रही थी, लेकिन जांच का कोई ठोस आधार नहीं था। अब पुलिस के पास जांच के पर्याप्त आधार हैं। असलहा रिकॉर्ड से जुड़े कई रजिस्ट्ररों में भी हेराफेरी की गई है।
विज्ञापन

असलहा दफ्तर से उपलब्ध कराए गए यूनिक आईडी
यूनिक आईडी भी असलहा दफ्तर से ही उपलब्ध कराए गए हैं। फर्जी लाइसेंस पर पड़े एक भी नंबर फर्जी नहीं मिले हैं। इससे भी यह साफ हो गया था कि कुछ सरकारी कर्मचारियों की भूमिका तो है ही।
रवि ने गिनाए कलेक्ट्रेट कर्मचारियों के नाम
गिरफ्तार रवि पांडेय के साथ गन हाउस पहुंची पुलिस और प्रशासनिक टीम उस वक्त हैरान रह गई, जब आरोपी रवि ने एक-एक करके कलेक्ट्रेट कर्मचारियों के नाम गिनाने शुरू कर दिए। मीडिया के सामने ही रवि ने असलहा बाबू राम सिंह का नाम लिया और आरोप लगाते हुए कहा कि सब उन्हीं का किया-धरा है। रवि ने राम सिंह के साथ ही असलहा दफ्तर के अमर, कुलदीप और अजय गिरी का नाम भी लिया है। इस मामले में राम सिंह और संदेश के घेरे में आए लोगों से मोबाइल फोन पर पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। राम सिंह के व्हाट्सएप पर पक्ष जानने का संदेश भेजा गया, लेकिन जवाब नहीं मिला। जब भी उनका पक्ष आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।
असली लाइसेंस समझकर बेचते थे असलहा
रवि ने कहा कि फर्जी लाइसेंस की जानकारी नहीं थी। असली लाइसेंस समझकर ही असलहा बेचते थे। असलहा बाबू ही पूरा गैंग चलाते थे, वहां से लाइसेंस बनता था और फिर उसे असली समझकर ही असलहा बेचा करते थे। मुझे बाद में पता चला कि असलहा बाबू फर्जी लाइसेंस बनाया करते थे।
विज्ञापन

रवि गन हाउस के रवि पांडेय से पूछताछ में असलहा दफ्तर के कई कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। अभी तक की जांच से यही संकेत मिले हैं कि असलहा दफ्तर से ही फर्जी लाइसेंस बने हैं। पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रोहन प्रमोद बोत्रे, एएसपी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें