फर्जी लाइसेंस प्रकरण: एक असलहा बाबू समेत कलेक्ट्रेट के आधा दर्जन कर्मचारी पर लटकी तलवार
गोरखपुर। फर्जी लाइसेंस बनाने और उनपर शस्त्र भी खरीद लेने के सनसनीखेज प्रकरण में एक असलहा बाबू समेत कलेक्ट्रेट के आधा दर्जन कर्मचारी जांच के दायरे में हैं। उनके खिलाफ जल्द ही कार्रवाई हो सकती है। जिला प्रशासन का दावा है कि उनकी जांच अब मंजिल के करीब है। शुरू में ना-ना करने वाला प्रशासन अब यह मान रहा है कि इस पूरे खेल में एक असलहा बाबू समेत कलेक्ट्रेट के भी करीब आधा दर्जन कर्मचारी शामिल है। यही नहीं प्रशासन यह भी दावा कर रहा है कि इस पूरे खेल का मास्टर माइंड रवि आर्म्स कार्पोरेशन का प्रोपराइटर भी उनकी पकड़ से दूर नहीं। सूत्र बताते हैं कि प्रोपराइटर पुलिस के हत्थे भी चढ़ गया है। यही वजह है कि प्रशासन दो दिन के भीतर इस मामले के खुलासे का दावा कर रहा है।
वहीं मुख्यमंत्री के शहर में इतने बड़े फर्जीवाड़े से हुई फजीहत से खफा प्रशासन इस मामले में दोषी अपने सिस्टम के सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई कर नजीर पेश करने की तैयारी में है। विश्वस्त प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक इस मामले की जांच के लिए पुलिस के अलावा डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने एक प्रशासनिक कमेटी भी गठित की थी। इनके अलावा डीएम ने अपना भी एक खुफिया तंत्र लगाया था। इस तंत्र ने डीएम को इस मामले से जुड़ी कई ठोस जानकारियां भी उपलब्ध कराई हैं। पूर्व में तैनात एक असलहा बाबू की भी भूमिका संदिग्ध मानकर जांच कराई र्गई तो उनकी भी मिलीभगत सामने आई है। फर्जी लाइसेंस बनाने के आरोपित विजय प्रताप ने एक कार दी थी। उसका तस्वीर वायरल हो गई थी। पुलिस ने अब तक जितने लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया सभी ने इस असलहा बाबू का नाम भी लिया है। इसके अलावा डीएम के हाथ कई अहम सुराग भी लगे हैं, जो संबंधित असलहा बाबू समेत कुछ और कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।
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मामले का जल्द खुलासा हो जाएगा। जांच तकरीबन नतीजे तक पहुंच चुकी है। मास्टर माइंड भी पकड़ से बहुत दूर नहीं है। फर्जी लाइसेंस बनाने और उनपर शस्त्र खरीदने के किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। खेल में किसकी-किसकी संलिप्तता है, इसका खुलासा समय कर दिया जाएगा।- के. विजयेंद्र पांडियन, डीएम