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अवैध निर्माण गिराने गई टीम खाली हाथ लौटी

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गोड़धोइया नाला: जेसीबी का पहिया मिट्टी में धंसने से कब्जा गिराने गई टीम खाली हाथ लौटी
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गोरखपुर। गोड़धोइया नाले की जमीन पर हुए अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने गई जीडीए, नगर निगम और प्रशासन की टीम को गुरुवार को खाली हाथ लौटना पड़ा। लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश की वजह से जेसीबी के पहिए मिट्टी में धंस जाने से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो सकी। टीम ने अवैध निर्माण कराने वालों को चेतावनी दी है कि तीन दिन में खुद ही कब्जा हटा लें वर्ना 15 जुलाई को टीम ध्वस्तीकरण कराएगी।
शहर के सबसे चौड़े और गहरे गोड़धोइया नाले पर जगह-जगह अवैध निर्माण आदि की वजह से नगर निगम इसकी सफाई नहीं करा पाता है। जिससे बरसात के मौसम में कई कॉलोनियों में जलभराव हो जाता है। इन दिनों भी जंगल तुलसीराम पश्चिमी वार्ड के करीब सौ घरों के चारो ओर एक महीने से पानी का पहरा है। एनजीटी की हाईपावर कमेटी ने भी नाले से अवैध कब्जे हटाकर उसका प्राकृतिक बहाव सुनिश्चित करने को कहा है। इसके लिए अवैध निर्माण को चिह्नित कर कार्रवाई करने के लिए जीडीए, नगर निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम बनाई गई है। जीडीए ने नाले का निरीक्षण कर 17 ऐसे निर्माण चिह्नित किए जो नाले की जमीन पर हुए थे। संबंधित को नोटिस भी जारी किया गया। कार्रवाई करने गई टीम में जीडीए सचिव राम सिंह गौतम, अपर नगर आयुक्त डीके सिन्हा, नायब तहसीलदार, पुलिस समेत तीनों विभागों के कई अधिकारी मौज्ूाद रहे। वहीं पार्षद अभिमन्यु मौर्या समेत अन्य लोग भी मौके पर मौजूद रहे।
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20 मीटर चौड़ा पर वजूद खोजना मुश्किल
गोड़धोइया नाले की लंबाई करीब सात किलोमीटर है। जीडीए की महायोजना में नाले की चौड़ाई करीब 20 मीटर है । नाला बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज की तरफ से चलकर रामगढ़ताल में आकर मिलता है। रामगढ़ ताल के लिए यह नाला नेचुरल चार्जर का काम करता है। मगर मौके पर कहीं-कहीं नाले का वजूद ही मिट चुका है। फ ातिमा, पादरी बाजार, जंगल तुलसीराम पश्चिमी और मैत्रीपुरम में तो नाले की जमीन पर ही निर्माण करा लिया गया है।
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