कुलपति को लेकर स्व-वित्तपोषित कॉलेजों के प्राचार्य दो धड़े में बंट गए हैं। कुलपति के विरोधी खेमे ने शुक्रवार को स्व-वित्तपोषित महाविद्यालय प्राचार्य परिषद की नई कार्यकारिणी का गठन कर दिया तो कुलपति के साथ खड़ी वर्तमान कार्यकारिणी ने इस चयन को निराधार और असंवैधानिक घोषित कर दिया।
कुलपति के विरोधी खेमे की ओर से शुक्रवार को महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज जंगल धूसड़ में बैठक बुलाई गई। इस दौरान कुलपति की कार्यशैली की निंदा और भर्त्सना करते हुए 21 सदस्यीय प्राचार्य परिषद का गठन किया गया। परिषद की नई कार्यकारिणी में डॉ. शैलेंद्र कुमार उपाध्याय को अध्यक्ष और डॉ. प्रमोद कुमार तिवारी को महामंत्री चुना गया। डॉ. प्रमोद पांडेय और डॉ. रामदरश मिश्र उपाध्यक्ष बनाए गए। डॉ. अनिल सिंह सहमंत्री, डॉ. रामेश्वर पांडेय प्रसाद गुप्त कोषाध्यक्ष और डॉ. प्रदीप राव प्रवक्ता चुने गए। गठन के बाद प्रवक्ता डॉ. प्रदीप राव ने वर्तमान कार्यकारिणी के खिलाफ निंदा और अविश्वास प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। जब नई कार्यकारिणी के गठन की जानकारी वर्तमान कार्यकारिणी को मिली तो उन्होंने इसका सीधा विरोध किया।
वर्तमान कार्यकारिणी के अध्यक्ष डॉ. एसएन चौबे और महामंत्री डॉ. एसके मिश्रा ने नई कार्यकारिणी को असंवैधानिक और निराधार घोषित कर दिया। महामंत्री डॉ. मिश्रा ने कहा कि कार्यकारिणी की बैठक बुलाने का अधिकार केवल महामंत्री को है और उन्होंने कोई बैठक नहीं बुलाई थी। डॉ. मिश्रा ने बताया कि शनिवार की शाम कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है, जिसमें अवैध ढंग से नई कार्यकारिणी का गठन करने वाले प्राचार्यों पर कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।