गोरखपुर यूनिवर्सिटी के ललित कला व संगीत विभाग में चल रही कार्यशाला का तीसरा दिन भी कला के विविध आयामों को समेटे हुए था। कार्यक्रम की शास्त्रीयता बनाए रखने के लिए रागों की पहचान थी तो सितार की मधुर झंकार भी। संगीत की धुन पर जब मदर टरेसा के चित्र को उकेरा गया तो माहौल में मातृत्व भर गया। चार दिवसीय कार्यशाला का शनिवार को समापन होगा।
तीसरे दिन के कार्यक्रम की शुरुआत रेल दावा अधिकरण के सदस्य केएल पांडेय ने की। सैकड़ों फिल्मी गीतों की शास्त्रीयता का सर्वेक्षण कर उनमें राग तलाशने वाले केएल ने विद्यार्थियों को अपने अनुभव से समृद्ध किया। जब उन्होंने एक फिल्मी गीत में कई रागों की जानकारी दी तो विद्यार्थी हतप्रभ रह गए। कार्यक्रम की खासियत यह रही कि इसमें न केवल बाकायदा प्रायोगिक तौर पर राग पहचानने की तरकीब बताई गई बल्कि विद्यार्थियों को भी ऐसा करने का अवसर दिया गया। इसके बाद मंच पर उतरीं देश की एकमात्र डीलिट् सितार वादक आगरा की प्रो. लवली शर्मा। उन्होंने जब सितार की धुन छेड़ी तो लोग मंत्रमुग्ध हो गये। राग शुद्ध सारंग में अलाप, जोड़, झाला, विलंबित तीन ताल, विलंबित गत, द्रुत गति तीन ताल के मेल ने संगीत के कद्रदानों को संवाद भवन की कुर्सियों से हिलने नहीं दिया। एक घंटे का वक्त कब बीत गया पता ही नहीं चला।
धुन पर उकेरा चित्र
दूसरे सत्र में मंच पर थे व्यवहारिक कला विशेषज्ञ प्रो. साजन कुरियन मैथ्यू। उनका साथ दे रहे थे संजय सिंह। राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय, ग्वालियर से आए संजय सिंह ने मदर टेरसा से जुड़े गीत उजियारा वतन हम तुम साथी, आओ नव इतिहास लिखें... पर धुन छेड़ी तो प्रो. साजन ने इस दौरान कैनवास पर मदर टेरेसा का ऑयल चित्र उकेर दिया। चित्रकला और संगीत के इस संयोजन ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि कला के भले ही विविध आयाम हैं, लेकिन कहीं आपस में जुड़े हुए हैं।
पेंटिंग विथ म्यूजिक की है धुन
राजा मान सिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के व्यवहारिक कला के प्रो. साजन कुरियन मैथ्यू चित्रकला को संगीत से अलग नहीं मानते। उनका कहना है कि दोनों आपस में अनिवार्य रूप से जुड़े हुए हैं। प्रो. मैथ्यू की इसी सोच ने उन्हें संगीत पर चित्र उकेरने के लिए मजबूर कर दिया जो अब उनका शगल बन गया है। वह बताते हैं कि अब तो संगीत पर चित्र बनाने में ही सुकून मिलता है। उनके ही प्रयासों से अब म्यूजिक विथ पेंटिंग का शौक पूरे देश में दिखने लगा है। विश्वविद्यालय के कला और संगीत के संयुक्त नाम ने उन्हें इस दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
सितार को बचाए रखने की मुहिम
आगरा से कार्यशाला में हिस्सा लेने आईं प्रो. लवली शर्मा ने पारंपरिक वाद्ययंत्र सितार को बचाए रखने की मुहिम चला रखी है। प्रो. शर्मा का कहना है कि सितार वादक तो काफी कम हो गए हैं, उसे बचाने वाले भी अब कम हैं। इसके पीछे लोगों की शास्त्रीय संगीत में घट रही रुचि है। ऐसे में इसके लिए मुहिम चलाना बहुत जरूरी है और यही काम वो पूरी शिद्दत से कर रही हैं। मैहर घराने से संगीत की शिक्षा लेने वाली प्रो. लवली बतातीं हैं कि उन्होंने शास्त्रीय संगीत के माध्यम से स्ट्रेस रिलीफ की दिशा में काफी काम किया है। इसके लिए 2003 से 2007 के बीच आगरा जेल में कैदियों पर म्यूजिक थेरैपी का प्रयास किया था, जो काफी सफल रहा था। फिलहाल वो विश्व सांस्कृतिक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए 170 कलाकारों को तैयार करने में जुटी हैं। जो अगले साल होने वाला है।