बीएड में प्रवेश को लेकर हाईकोर्ट से आदेश मिलने के बाद भी गोरखपुर यूनिवर्सिटी की चुप्पी ने कॉलेजों की दुविधा बढ़ा दी है, जिसके चलते कॉलेज प्रबंधन यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन में भटकते नजर आ रहे हैं।
बिना एनओसी मान्यता हासिल करने का दोषी बताते हुए गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने 41 बीएड कॉलेजों की संबद्धता पर रोक लगा दी तो परेशान कॉलेजों ने हाईकोर्ट की शरण ली। स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय केशवापार को पक्ष में आदेश हासिल करने में सफलता भी मिली। लेकिन सफलता की खुशी तब काफूर हो गई जब छह दिन बाद भी यूनिवर्सिटी ने इसे लेकर अपना कोई निर्णय नहीं सुनाया। इस सत्र की काउंसिलिंग में शामिल करने के हाईकोर्ट के साफ निर्देश के बावजूद विधिक राय की पेंच में फंसा इस कॉलेज के बीएड संबद्धता का मामला बीएड के अन्य कॉलेजों के बीच चिंता का विषय बन गया है।
हर रोज बढ़ रही काउंसिलिंग प्रक्रिया भी कॉलेज प्रबंधन की नींद उड़ाए हुए है। इस बीच स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय को हाईकोर्ट में मिली सफलता से उत्साहित देवरिया जिले के छह और कॉलेजों ने भी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसे स्वीकार भी कर लिया गया है। इन छह कॉलेजों में लीलावती देवी महिला महाविद्यालय, परमहंस बबुआजी गर्ल्स एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय, राजेश्वरी देवी रामसुभग सिंह महाविद्यालय, बाबू कैलाश प्रसाद महाविद्यालय और बाबू बैजनाथ महाविद्यालय शामिल हैं। याचिका स्वीकार करने के बाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी को जवाब 13 जून तक जवाब देने को कहा है।