दो महीने से चल रही गोरखपुर यूनिवर्सिटी की वार्षिक परीक्षाएं सोमवार को संपन्न हो गई। इससे यूनिवर्सिटी के परीक्षा विभाग ने राहत की सांस ली। साथ ही परीक्षा तय समय में पूरी करा लेने को लेकर अधिकारियों के चेहरे पर चमक भी दिखी।
लेकिन इस खुशी के बीच एक दुखद पहलू यह भी है कि नकल रोकने को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन नाकाम साबित हुआ है। इंतजाम और सख्ती के दावे के बावजूद पिछली परीक्षा के मुकाबले कॉलेजों से मिली नकल की रिपोर्ट पिछले वर्ष के मुकाबले करीब दूनी हो गईं। अनुचित साधनों के इस्तेमाल करने वाले विद्यार्थियों की तादाद में खासा इजाफा हुआ है।
देवरिया के रुद्रपुर में एक दिन पहले ही परीक्षा करा लेने की शिकायत और कुशीनगर के रगड़गंज में परीक्षा से पहले ही कॉपी लिखे जाने को लेकर मचा हंगामा नकल रोकने में असफलता की बानगी है। यूनिवर्सिटी सूत्रों की माने तो कॉलेजों से मिली अनुचित सामग्री की मात्रा भी पिछले साल के मुकाबले दूनी रही।
सामूहिक नकल की रिपोर्ट को लेकर यदि पिछले वर्ष से तुलना करें तो पिछले वर्ष जहां समूची परीक्षा के दौरान 73 कॉलेजों के खिलाफ सामूहिक नकल की रिपोर्ट की गई थी, वहीं इस बार यह संख्या आधी परीक्षा के दौरान ही पार कर गई। परीक्षा पूरी होने तक यह संख्या 134 तक पहुंच गई। इस संख्या को बढ़ाने में सर्वाधिक योगदान देवरिया जिले का रहा, जहां 44 कॉलेजों के खिलाफ सामूहिक नकल की रिपोर्ट सचल दस्ते ने की है।
सचल दस्ते की दूसरी पारी में तो एक तिहाई हिस्सा देवरिया का ही है। सचल दस्ते की दूसरी पारी के मुखिया डॉ. श्रीवर्धन पाठक ने बताया कि एक दो अप्रैल से दो मई के बीच 20 दिन की परीक्षा में 61 कॉलेजों के खिलाफ सामूहिक नकल की रिपोर्ट हुई, इसमें 21 कॉलेज देवरिया जिले के हैं। इस दौरान 200 विद्यार्थी अनुचित साधन के साथ रंगे हाथों पकड़े गए। जिनके खिलाफ रस्टीकेशन की कार्रवाई हुई।
जांच कमेटी पर टिकी निगाहें
सचल दस्ते ने अपनी रिपोर्ट तो यूनिवर्सिटी प्रशासन को सौंप दी है लेकिन अब सभी की निगाहें उस नकल जांच कमेटी पर टिक गई हैं, जिन्हें रिपोर्ट की पड़ताल करनी है। पिछले सत्र में जांच कमेटी की रिपोर्ट पर यदि गौर करें तो 73 में से 23 कॉलेजों में नकल की रिपोर्ट पर कमेटी ने मुहर लगा दी थी। इस बार जब सचल दस्ते ने इसकी तादाद करीब दूनी कर दी है तो जांच कमेटी के फैसले का इंतजार भी दूना हो गया है।