केंद्रीय मंत्री ने महंत दिग्विजयनाथ व अवेद्यनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि दोनों संत त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। योगी आदित्यनाथ से अपने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि एक आंदोलन में शामिल होने के लिए योगी को लेकर उड़ीसा गए थे। उनसे पुरी में दर्शन करने की बात कही तो उन्होंने कहा कि यहां पर जो रहा है वह ठीक नहीं है।
उस दौरान किसी मंदिर में अनुसूचित जाति के लोगों के प्रवेश को लेकर बवाल मचा था। योगी ने कहा कि पहले इसके खिलाफ आंदोलन चलना चाहिए। किसी हिंदू को मंदिर में प्रवेश से कैसे रोका जा रहा है। यह बात मुझे समझ में आई उनके जीवन में उनके गुरुदेव के संस्कारों का असर है जिन्होंने छुआछूत के खिलाफ पूरे देश में अभियान चलाया था। सच यह है कि सामाजिक समरसता गोरक्ष पीठ का संस्कार और उसकी पहचान है।