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शुद्ध हास्य वही जिस पर पूरा कुनबा साथ हंस सके

Sun, 31 Jan 2016 02:29 AM IST
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
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लाफ्टर चैलेंज के जरिए घर-घर में पहचाने गए अहसान कुरैशी के हास्य की पहचान अलग है। सामाजिक-राजनीतिक विद्रूप को उन्होंने अनूठी अभिव्यक्ति दी है। शनिवार को अहसान गोरखपुर में थे। उनके साथ वीआईपी और सुरेश अलबेला भी आए। संवाददाताओं से मुख्तसर बातचीत में उन्होंने हास्य-परिहास को लेकर अपना नजरिया साझा किया। कहा कि वे हास्य में सस्ती जबान के खिलाफ हैं।
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वे वही कॉमेडी देते हैं, जिससे पूरा परिवार एक साथ खिलखिला सके। हास्य में फूहड़ता के मेल के बढ़ते चलन के सवाल पर बड़ी साफगोई से कहा, ‘आप देखना छोड़ दें तो वे ऐसा करना छोड़ देंगे।’ अहसान की बात पूरी होते ही सुरेश ने तपाक से जोड़ा, ‘सब टीआरपी का कमाल है और टीआरपी का भविष्य जनता तय करती है। ऐसे में सस्ती कॉमेडी की उम्र भी वही बता सकती है।’

विशुद्ध परिहास को परिभाषित करने के सवाल पर अहसान बोले, ‘जिसे देखने-सुनने के लिए हमउम्र तलाश न करना पड़े। यानी जिस परिहास के लिए उम्र की सीमा न तय की जाए, वही शुद्ध परिहास है।’ पिछले दिनों कीकू शारदा के साथ हुए बरताव के बारे में पूछने पर अहसान ने स्वीकार किया कि एकबारगी तो वे डर ही गए थे कि अगर ऐसा ही होगा तो कॉमेडी का कन्टेंट कहां से मिलेगा? अच्छी कॉमेडी के लिए लोगों को हमारे हास्य को खुले दिल से स्वीकार करना होगा। वीआईपी से रहा नहीं गया। वह बोल पड़े कि राम-रहीम जब फिल्म स्टार हो गए तो उन्हें तो यह सब सुनना ही पड़ेगा। इसमें बुरा मानने वाली कोई बात होनी ही नहीं चाहिए।
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तीनों ने कहा कि यदि कॉमेडी करने वालों की बातों को दिल से लगाने लगेंगे तो उन्हें जीवन के बीच से उपजे हास्य से हाथ धोना पड़ेगा। हास्य के संसाधन टीवी पर सीमित होने के सवाल पर अहसान बोले, ‘टीवी ही वह माध्यम है, जिससे विविध संस्कृति से जुड़ा हास्य देश के कोने-कोने में पहुंच रहा है।’ उनकी बात पर मुहर लगाते हुए सुरेश ने कहा कि हम आज यहां हैं तो टीवी की बदौलत ही हैं। स्वत:स्फूर्त प्रतिक्रिया के बजाय स्क्रिप्ट पर कॉमेडी के तजुर्बे का सवाल बीच में ही काटकर अहसान बोले, ‘मैं तो स्क्रिप्ट की कॉमेडी में भी अपनी छाप छोड़ना नहीं भूलता। और अगर इससे हास्य का स्तर बढ़ता है तो कोई निर्देशक ऐसा करने से नहीं रोकता।’

हॉकी से नहीं तो कॉमेडी से सही
अहसान कुरैशी हॉकी का अपना शौक साझा करना नहीं भूले। बताया कि वह प्रदेश स्तर पर हॉकी खेल चुके हैं। तमन्ना थी कि राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी के तौर पर पहचान बना सकें। वहां तक तो नहीं पहुंच सके लेकिन तालियों की ख्वाहिश जरूर पूरी हुई। इसके लिए वह कॉमेडी के शुक्रगुजार हैं। हालांकि हॉकी की दुर्दशा पर चर्चा करने से भी वह खुद को नहीं रोक पाए।

वीआईपी ने ही दिलाई ख्याति
खास किस्म के नाम के रहस्य से पर्दा उठाते हुए वीआईपी ने बताया कि उनका पूरा नाम विजय ईश्वरलाल पवार है। नाम को छोटा करके वीआईपी बुलाने की शुरुआत तो स्कूल के दिनों में ही हो गई थी। लेकिन तब सहपाठी वीआईपी अंडरवियर और वेरी इडियट पर्सन कहकर चिढ़ाते थे और वह इस बात पर खीझते भी थे। तब कहां मालूम था कि नाम का यह संक्षिप्तिकरण ही उनकी ख्याति की वजह बन जाएगा?

पहुंच ही गए बाबा की धरती पर
सुरेश अलबेला ने बातचीत की शुरुआत में बाबा गोरक्षनाथ को प्रणाम किया और बोले आखिर पहुंच ही गए बाबा की धरती पर। बताया कि राजस्थान का होने बावजूद बचपन से गोरक्षनाथ धाम के तौर पर गोरखपुर का नाम सुनते आए। यहां आने की बहुत ख्वाहिश थी। गोरखपुर महोत्सव ने वह ख्वाहिश पूरी कर दी।
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