‘महोत्सव की शाम ठहाकों के नाम’ की थीम के साथ जब देश के तीन नामचीन हास्य कलाकार गोरखपुर महोत्सव के दूसरे दिन शाम को मंच पर उतरे तो उन्होंने अपने आने की सार्थकता साबित करने में जरा भी देर नहीं की। तंज के बीच हास्य परोसने की उनकी कला को सभी ने सलाम किया। अहसान और अलबेला के तंज ठहाकों में कैसे बदल रहे थे, दर्शक इससे बेफिक्र होकर माहौल का लुत्फ उठा रहे थे। वीआईपी की मिमिक्री पर हंसी के साथ अचरज का भाव सभी के चेहरे पर साफ नजर आया।
मंच की कमान सबसे पहले अहसान कुरैशी ने संभाली। अपनी कॉमेडी की विकास यात्रा से उन्होंने पहले राष्ट्रभक्ति की भावना लोगों में भरी। उसके बाद शुरू हुआ आम आदमी की जिंदगी के बीच से चुटकुले निकालकर परोसने का सिलसिला। अहसान के निशाने पर महिलाएं विशेष तौर पर रहीं। बीवी के बहाने उन्होंने महिलाओं को अपनी कॉमेडी से गुदगुदाने की कोशिश की और सफल भी रहेे। महिलाओं से माफी भी मांगते रहे मगर उन्हें बख्शा भी नहीं। घर से निकले चुटकुलों को खुद से जोड़ा तो कोई भी चेहरा मुस्कुराए या खिलखिलाए बिना नहीं रह सका। दफ्तर से छुट्टी लेने के बहाने पर उनका व्यंग्य सभी को छू गया।
अहसान के बाद मंच पर नजर आए मिमिक्री कलाकार वीआईपी। गायक हेमंत कुमार की मिमिक्री से शुरू हुआ मिमिक्री का सिलसिला तब थमा जब उन्होंने एक साथ 52 अभिनेताओं, नेताओं और गायक कलाकारों की आवाज एक सांस में निकाली। एंकर नाम लेती रही, वीआईपी आवाज निकालते रहे और तालियां बजती रहीं। अंत में आई सुरेश अलबेला की बारी। टीवी सीरियल के नाम पर व्यंग्यात्मक लहजे में सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने जब नेताओं की पैदाइश से उनके व्यक्तित्व को जोड़ा तो लोग उनकी प्रतिभा के कायल हो गए। बीच-बीच में सुष्मिता के गीतों की प्रस्तुति और तृप्ति के जनता से संवाद करने वाले संचालन का भी लोगों ने खूब लुत्फ उठाया।