फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेल में उड़ाए गए ड्रोन, बज उठी पगली घंटी

विज्ञापन
मंडलीय कारागार में बवाल के बाद जेल में पहुंची फायर ब्रिगेड की गाड़ियां।
विज्ञापन
जेल में उड़ाए गए ड्रोन, बज उठी पगली घंटी
विज्ञापन

पादरीबाजार (गोरखपुर)। मंडलीय जेल में बवाल की खबर पाते ही मौके पर गई फोर्स ने जेल में ड्रोन कैमरे भी उड़ाए। दरअसल, कैदी पेड़ों पर भी चढ़ गए थे और ईंट-पत्थर भी फेंक रहे थे। बवाल को बढ़ता देख जेल प्रशासन ने तत्काल पगली घंटी बजाते हुए जेल की बिजली काट दी। मुख्य दरवाजे पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। मुलाकातियों को भी बाहर कर दिया गया। हालात पर काबू पाने के लिए डायल 100 की बाइक सवार पुलिस भी अंदर गई। उधर, जेल चौकी पर बैठकर डीएम, एसएसपी लगातार हालात का जायजा लेते रहे।
इसलिए बजती है पगली घंटी
जेल में आपात स्थित होने पर पगली घंटी बजाई जाती है। यह घंटी बजने का मतलब होता है कि जेल के मुख्य दरवाजे पर सुरक्षा बढ़ा दी जाती है। जेल प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े लोगों के अलावा मुलाकाती को भी बाहर कर दिया जाता है। सुरक्षा में तैनात सभी कर्मचारी डंडा और सिक्योरिटी जैकेट पहनकर तैयार हो जाते है। घंटी का मतलब सीधा है कि अब हालात बेकाबू है और कभी भी अफसर लाठीचार्ज या कोई अन्य आदेश दे सकते हैं। यह घंटी तीन बार बजने पर सुरक्षा तैनात पुलिस वाले फायरिंग शुरू कर देते हैं।
विज्ञापन

अफसर बोले- सब सामान्य, फिर दौड़े
सुबह साढ़े दस बजे के करीब एडीएम सिटी राकेश कुमार सिंह, एसपी सिटी डॉ. कौस्तुभ बाहर आकर सबकुछ सामान्य होने का मीडिया को बयान दे रहे थे, तो दूसरी ओर जेल में बवाल एक बार फिर भड़क गया। आलम यह था कि डीएम, एसएसपी मौक से निकल चुके थे, लेकिन असुरन चौक के पास दोबारा जेल की ओर जाना पड़ा। बिस्मिल पार्क में रोकी गई फोर्स के साथ एसपी सिटी दोबारा अंदर गए और दो बजे के करीब मामला शांत कराया जा सका।
जेल अधीक्षक के कक्ष में जाकर की तोड़फोड़
बंदी इतने भड़के थे इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह निर्धारित सर्किल को पार कर जेल अधीक्षक के कक्ष तक पहुंच गए। उसमें रखी कुर्सियां तोड़ दीं। सीसी कैमरों को क्षति पहुंचाने की कोशिश की गई है। हर बवाल के दौरान जेल में पहले कैमरों को ही क्षतिग्रस्त किया जाता है, ताकि जांच में बंदियों की पहचान ना हो सके।
चिन्हित कर दूसरे जेल भेजा जाएगा
जेलर ने बताया कि जिन कैदियों या बंदियों ने हंगामा किया है, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है। सभी को दूसरे जेल में शिफ्ट करने के लिए पत्र तैयार कर शासन में भेजा जाएगा। जेल में गुटबाजी नहीं होने दी जाएगी।
दो बजे से कराई गई मुलाकात
मुलाकाती अपने परिजनों से मिलने के बाहर ही इंतजार कर रहे थे। दो बजे पूरी तरह से जेल में मामला शांत होने के बाद मुलाकात कराई गई। रोजाना दो शिफ्ट में मुलाकात होती थी, लेकिन शुक्रवार को बवाल की वजह से सिर्फ एक शिफ्ट में ही मुलाकात कराई गई है।
सपा ने की न्यायिक जांच की मांग
सपा के निवर्तमान जिला अध्यक्ष प्रह्लाद यादव ने जेल में हुए बवाल कि न्यायिक जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पुलिस ने अंदर जाकर बंदियों से मारपीट की हैै। इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषी पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
विज्ञापन

तीन साल पहले भी अक्तूबर में ही हुआ था बवाल
13 अक्तूबर 2016 को भी मंडलीय कारागार में बवाल हुआ था। तब साथी सजायाफ्ता कैदी सूर्यभान की मौत पर बंदी भड़क गए थे और जेल में जमकर तोड़फोड़ की थी। इस मामले में छह लोग घायल हो गए थे। जैमर और सीसी टीवी कैमरे भी तोड़ दिए गए थे। जेल पर कैदियों ने पूरी तरह से कब्जा कर लिया था। 24 घंटे बाद पुलिस की मदद से जेल में व्यवस्था बहाल हो पाई थी। एक बार फिर अक्तूबर में ही बवाल हुआ है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें