हाईटेंशन लाइन के नीचे बस गईं कालोनियां
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गोरखपुर शहर में हाईटेंशन लाइन के नीचे कई कालोनियों में आवास बना दिए गए। जानबूझकर जान जोखिम में डालने की यह कोशिश कम होने की बजाय बढ़ती जा रही है। बिजली विभाग ने ऐसे आवासों की तरफ कभी ध्यान ही नहीं दिया। यही नहीं निर्माणाधीन आवासों को भी रोकने की कोशिश नहीं की गई, जबकि हाईटेंशन तार की जद में आने से लगातार मौतें हो रही हैं। बृहस्पतिवार को शहर के सिंघाडियां में हुआ हादसा इसका ताजा उदाहरण है।
शहर के शक्तिनगर, शिवाजी नगर, महुईसुघरपुर, गोपलापुर, तारामंडल, सिंघड़िया, विकासनगर आदि मोहल्लों में बहुत सारे मकान हाईटेंशन तार के नीचे ही बने हैं। हद तो यह है कि बिजली विभाग के पास कोई ऐसा आंकड़ा भी नहीं है कि हाईटेंशन तार कितने कालोनियों से गुजरी हैं और इसकी जद में कितने आवास हैं। यही नहीं, हाईटेंशन लाइन की देखरेख करने वाले अधिकारियों ने भी कभी रिपोर्ट नहीं दी। सुरक्षा मानकों की जांच नहीं की गई और न ही अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया।
लाइन शिफ्ट करने पर खर्च का बहाना
जिन कॉलोनियों में हाईटेंशन लाइन गई है, वहां लाइन शिफ्ट करने की पर्याप्त जगह है। वहां के लोगों ने शिफ्टिंग की मांग भी की है। लेकिन जब भी अधिकारियों के पास पत्र आता है वे खर्च का हवाला देकर टाल जाते हैं।