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सिक्के बदलने को कमीशन दे रहे छोटे दुकानदार

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भैया फरेंदा में सिक्कों की गिनती करते दुकानदार रामअशीष। - फोटो : MAHARAJGANJ
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सिक्के बदलने को कमीशन दे रहे छोटे दुकानदार
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बैंक कर्मचारी गिनती करने में असमर्थता जता नहीं ले रहे
अमर उजाला ब्यूरो
फरेंदा। एक व दो रुपये के साथ ही अन्य सिक्के भी दुकानदारों के लिए समस्या बन गए हैं। हालत यह है कि दुकानदार कमीशन देकर सिक्कों को बदलने को विवश है। उधर, दुकानदार जब सिक्के लेकर बैंक पहुंच रहे हैं तो कर्मचारी गिनती कर पाने में असमर्थता जताते हुए सिक्के लेने से साफ मना कर रहे हैं। इसके चलते दुकानदारों के साथ ही ग्राहक भी सिक्के लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
कुछ छोटे व्यापारी बड़े व्यापारियों को दस फीसदी कमीशन देकर सिक्के उन्हें देने को विवश हैं। बैंकों में सिक्के न लिए जाने से दुकानदार परेशान हैं। सिक्कों को लेकर कभी कभार दुकानदार व ग्राहकों के बीच नोकझोंक की भी नौबत आ जाती है। कभी सिक्कों की खनक से बच्चे खुश हो जाते थे तो अब वही सिक्के लोगों के लिए सरदर्द बने हुए हैं। छोटे व्यापारी सिक्कों की खपत न होने परेशान हैं।
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विधायक बजरंग बहादुर सिंह का कहना है कि सिक्कों की समस्या गंभीर है। बैंक सिक्के नहीं ले रहे हैं, यह गंभीर मामला है। इस मसले पर वित्त मंत्री से बात की जाएगी। सिक्कों का लेनदेन होना चाहिए। देश की मुद्रा के साथ मनमानी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।
किराना व्यापारी प्रमोद जायसवाल का कहना है कि बैंक सौ रुपये से अधिक का सिक्का लेने को राजी नही हैं। उनकी पूंजी सिक्कों के रूप में फंसी रहती है। ग्राहक सामान लेने के बाद छोटा सिक्का ही थमाते हैं। कुछ सामान भी ऐसे होते हैं, जिसके लिए बड़ी नोट की कम ही आवश्यकता पड़ती है।
अखबार विक्रेता राजेश जायसवाल का कहना है कि अखबार के काम में रोजाना हजारो रुपये के सिक्के मिलते हैं। सिक्का जमा करने में बैंक आनाकानी करते हैं। सिक्के जी का जंजाल बने हुए है। विवश होकर सिक्कों को दस प्रतिशत कमीशन पर दूसरों को देना पड़ता है।
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व्यापारी सतीश गुप्ता ने बताया एक व दो रुपये के सिक्के दुकानदार व ग्राहकों के लिए परेशानी का सबब बने हुए है। अगर बैंक रोजाना एक हजार के सिक्के जमा करते तो बाजार में सिक्कों की समस्या कम होती।
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