सनातन संस्कृति के प्राण ग्रंथ गीता को अब गीताप्रेस नेपाली भाषा में भी छापने जा रहा है। नेपाल में गीता के नेपाली अनुवाद का काम पूरा होने वाला है। जनवरी में इसे प्रकाशन के लिए गीताप्रेस गोरखपुर कार्यालय भेजने की तैयारी है।
कुछ साल पहले तक हिंदू राष्ट्र के तौर पर पहचाने जाने वाले नेपाल में गीता सिर्फ पढ़ी ही नहीं बल्कि पूजी भी जाती है। देश दुनिया में विश्वसनीय और सस्ती कीमत पर धार्मिक साहित्य उपलब्ध कराने के लिए जाना जाने वाला गीताप्रेस इसे ध्यान में रखते हुए अब नेपाली में गीताप्रेस छापने जा रहा है। गीताप्रेस नेपाल के संस्थापक व्यवस्थापक जय किशन सारडा ने बताया कि संस्कृत से नेपाली में गीता का अनुवाद पूरा होने वाला है। काठमांडू शाखा पर इसे अंतिम रूप देने का काम जारी है। जनवरी तक यह पुस्तक प्रकाशन के लिए गीताप्रेस को सौंप दी जाएगी। इसका लाभ नेपाल की उस बड़ी आबादी को मिलेगा जो संस्कृत न जानने के चलते गीता के ज्ञान से अछूती रह जाती है।
रामायण, शिवपुराण, भागवत और हिमवंत खंड भी
गीताप्रेस की नेपाल शाखा के खुलने के बाद हिंदू संस्कृति की कई और पूज्य पुस्तकों के भी नेपाली भाषा में छापने की कवायद शुरू हुई। इसी कड़ी में जल्द ही रामायण, शिवपुराण, भागवत और हिमवंत खंड भी नेपाली भाषा में पढ़ने को मिलेगी। गीताप्रेस नेपाल के संस्थापक व्यवस्थापक जय किशन सारडा ने बताया कि संस्था के पास इन पुस्तकों का नेपाली अनुवाद तो है, लेकिन इसका कॉपीराइट नहीं है। 52 साल पुराने इस अनुवाद का कॉपीराइट लेने का काम जल्द पूरा हो जाएगा। इसके लिए अनुवाद करने वालों के परिवारों से संपर्क किया जा चुका है। इन पुस्तकों के नेपाली में आने से यहां की बहुसंख्यक हिंदू आबादी इसका लाभ उठा सकेगी।
नेपाली अनुवादों का लाल बहादुर शास्त्री कनेक्शन
गीताप्रेस नेपाल के संस्थापक व्यवस्थापक जय किशन सारडा ने बताया कि संस्कृत की रामायण, भागवत, शिवपुराण और हिमवंत खंड पुस्तकों का नेपाली अनुवाद 1965 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की नेपाल यात्रा के मद्देनजर हुआ था। तब बनारस के एक प्रकाशक ने इनका प्रकाशन भी किया था। अब गीताप्रेस कॉपीराइट लेकर इसका प्रकाशन करने की तैयारी में है।
अमेरिका और ब्रिटेन में सेंटर खोलने की योजना
गीताप्रेस नेपाल शाखा की नेपाली भाषी लोगों तक धार्मिक साहित्य पहुंचाने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन में भी सेंटर खोलने की योजना में है। गीताप्रेस नेपाल के संस्थापक व्यवस्थापक जय किशन सारडा ने बताया कि नेपाल की कुल आबादी पांच करोड़ है, लेकिन इसमें से करीब दो करोड़ लोग विदेशों में रोजीरोटी कमाते हैं। हमारी कोशिश है कि हम उन तक भी नेपाली भाषा में गीताप्रेस की पुस्तकें पहुंचाएं।
भोपाल जंक्शन पर भी लगेगा स्टाल
अब भोपाल जंक्शन पर भी गीताप्रेस की किताबें बिकेंगी। गीताप्रेस प्रबंधन नए साल में यहां स्टाल लगाने जा रहा है। जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर स्टाल का निर्माण पूरा हो चुका है। अब इसके उद्घाटन की तैयारी है। गीताप्रेस रेलवे नेटवर्क के जरिए पाठकों का दायरा बढ़ाने में जुटा है। इसी कवायद में संस्था ने देश के रेलवे स्टेशनों पर स्टाल खोलने शुरू किए। अब भोपाल में गीताप्रेस का 50वां रेलवे स्टाल खुलने जा रहा है। गीताप्रेस के उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि इससे पहले झांसी, बिलासपुर, रायगढ़, मथुरा, इलाहाबाद, पुरानी दिल्ली जंक्शन, नई दिल्ली, निजामुद्दीन, गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर समेत 49 रेलवे स्टेशनों पर गीताप्रेस के स्टाल खोले जा चुके हैं। गीताप्रेस ट्रस्ट का जोर राजस्थान के रेलवे स्टेशनों पर स्टाल खोलने पर भी है। ट्रस्टी ईश्वर प्रसाद पटवारी ने बताया कि जयपुर, जोधपुर और अजमेर स्टेशन पर भी स्टाल खोलने की योजना है।