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बाल शिशु गृह में नवजातों की मौत का मामला : बच्चों को छोड़ रात दो बजे सोने चली गई थी आया

Wed, 13 Dec 2017 09:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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जया और कार्तिकेय की फाइल फोटो। - फोटो : Amar Ujala
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जेल रोड स्थित बाल शिशु गृह में कार्तिकेय (37 दिन) और जया (27 दिन) की मौत के मामले में कुछ और चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक नौ और 10 दिसंबर की रात को संस्था की स्टाफ नर्स ड्यूटी पर नहीं थीं। दोनों ही रात आया शीला के जिम्मे बाल शिशु गृह के सभी बच्चे थे। नौ दिसंबर की रात दो बजे तक तो उसने कार्तिकेय और जया समेत दूसरे सभी बच्चों की देखरेख की मगर इसके बाद वह सोने चली गई। 10 दिसंबर की सुबह 5.30 बजे जब उसकी आंख खुली तो दोनों बच्चों की मौत हो चुकी थी।
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अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय गजेंद्र कुमार के नेतृत्व में मामले की जांच के लिए बनाई गई कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है। इस कमेटी में उनके अलावा अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ एसएन त्रिपाठी, जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास अग्रवाल और जिला प्रोबेशन अधिकारी भी शामिल थे। कमेटी ने मंगलवार की देर शाम डीएम को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। इसमें जिस तरह की लापरवाही का जिक्र किया गया है, डीएम राजीव रौतेला ने उसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने प्रोबेशन अधिकारी समेत संस्था के संचालकों समेत इस घटना से जुड़े सभी लोगों से स्पष्टीकरण मांगा है।

दोनों बच्चों के पोस्टमार्टम में मौत की वजह तो साफ नहीं हो पाई है मगर कमेटी की जांच रिपोर्ट में बाल शिशु गृह की तरफ से बच्चों की देखरेख में भारी लापरवाही की पुष्टि हुई है। पिपराइच के मुड़ेरी गांव की रहने वाली आया शीला ने कमेटी को लिखित बयान दर्ज कराया है कि घटना वाली रात दो बजे तक तो कार्तिकेय और जया को प्रत्येक दो-दो घंटे पर दूध पिलाती रही मगर उसके बाद वह सोने चली गई। सुबह 5.30 बजे जब उसने बच्चों के शरीर में कोई हरकत नहीं देखी तो संस्था की कार्यकर्ता एंजलिना मसीह को फोन पर सूचना दी। उन्होंने घर से आने के बाद दोनों बच्चों की डॉक्टर से जांच कराई जिन्होंने बच्चों को मरा घोषित कर दिया। कमेटी के सामने एंजलिना ने भी शीला के बयान की पुष्टि की है।
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10 नवंबर को कार्तिकेय, 20 को जिया हुई थी डिस्चार्ज
कमेटी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक एक माह के कार्तिकेय को तीन नवंबर की रात आठ बजे जेल रोड स्थित जैन हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। सांस लेने में दिक्कत की वजह से उसका सेप्टीसीमिया का इलाज किया जा रहा था। 10 नवंबर 2017 को डिस्चार्ज होने के बाद उसे जेल रोड स्थित बाल शिशु गृह भेजा गया। इसी तरह करीब एक माह की जया को भी 14 नवंबर को फातिमा हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक प्रीमैच्योर होने से जया कम वजन की थी। उसे बुखार था। वह दूध नहीं पी पा रही थी। उसका शरीर नीला पड़ गया था। ठीक होने पर 20 नवंबर को उसे बाल शिशु गृह ले जाया गया। कार्तिकेय देवरिया में रेलवे ट्रैक पर पाया गया था, जबकि जया को कोई दाउदपुर स्थित आर्यन हास्पिटल में लावारिस छोड़कर चला गया था।

जांच कमेटी को मिली ये प्रमुख लापरवाही
- बच्चों को रखे जाने वाले कमरों में ब्लोअर नहीं था
- निरीक्षण के वक्त दिन में भी कमरों का तापमान कम मिला
- संस्था में स्टाफ की कमी
- नौ और 10 दिसंबर की रात को स्टाफ नर्स ड्यूटी पर नहीं थीं
- नौ और 10 दिसंबर को बच्चों की देखरेख का जिम्मा सिर्फ एक आया शीला पर था
- ट्रेंड नहीं है आया शीला
- नौ दिसंबर की रात दो बजे सोने चली गई थी शीला

एक बच्चा और डिस्चार्ज हुआ
बाल शिशु गृह के जिन छह बच्चों की तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उनमें से एक और बच्चे अर्पित (23 दिन) की हालत सुधरने के बाद बुधवार को उसे भी डिस्चार्ज कर दिया गया। अब सिर्फ दो ही बच्चे रिया और दिया भर्ती हैं। शाम को दोनों का एक्सरे कराया गया। डॉक्टर का कहना है दोनों बच्चों की सेहत में भी तेजी से सुधार हो रहा है। एक्सरे की रिपोर्ट सामान्य आने पर उन्हें भी डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। तीन बच्चों को मंगलवार को ही डिस्चार्ज कर दिया गया था। इनमें शिवांगी प्रथम, शिवांगी द्वितीय और उत्कर्ष शामिल हैं। सभी बच्चों को शिशु गृह के सामने के अस्पताल जैन बाल चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। डॉ अंजू जैन का कहना है कि भर्ती बच्चों में कुछ को कोल्ड डायरिया तो कुछ को निमोनिया हुआ था।
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