गीडा की 33 औद्योगिक इकाइयों को श्वेत श्रेणी का प्रमाण पत्र
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की 33 औद्योगिक इकाइयों को श्वेत श्रेणी का प्रमाण पत्र दे दिया है। इस श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को अब हर वर्ष प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इससे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बेवजह की जांचों से भी मुक्ति मिल गई। इसके लिए गीडा के उद्योगपति लंबे समय से प्रयासरत थे। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के साथ उद्योगपतियों की आवाज को ‘अमर उजाला’ ने जोरदार तरीके से उठाया था।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की हाई पॉवर कमेटी की संस्तुति पर गीडा की एक फैक्ट्री पर 25 लाख रुपये का जुर्माना ठोंका गया, फिर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फैक्ट्री को सीज कर दिया। इस फैक्ट्री को श्वेत श्रेणी का प्रमाण पत्र मिला था। इस कार्रवाई को उद्योगपतियों के साथ ही चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज ने गलत ठहराया। साथ ही जिलाधिकारी, मंडलायुक्त से मिलकर मामले में दखल की मांग की, फिर भी सुनवाई नहीं हुई।
जून 2019 में उद्योग बंधु की बैठक में हिस्सा लेने आए औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना को भी समस्या बताई गई। इस पर औद्योगिक विकास मंत्री ने गीडा के सीईओ संजीव रंजन को औद्योगिक इकाइयों की श्रेणीवार सूची उद्योगपतियों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। डीएम, कमिश्नर और मंत्री के हस्तक्षेप के बाद भी मामला नहीं सुलझ सका, फिर ‘अमर उजाला’ ने मामले को उठाया तो अफसर जागे। अब औद्योगिक इकाइयों को श्वेत श्रेणी का प्रमाण पत्र मिलने पर गीडा के उद्योगपतियों ने खुशी जताई है।
एनओसी के ऑनलाइन विकल्प
श्वेत श्रेणी का प्रमाणपत्र पाने वाले उद्योग हर वर्ष दिसंबर में खुद ही ऑनलाइन एनओसी प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऑनलाइन औपचारिकता पूरी की जाएगी, फिर एनओसी जारी होगी।
इन इकाइयों को मिला श्वेत प्रमाण पत्र
शुद्ध प्लस हाइजिन प्रोडक्ट्स, गोकुल इंडस्ट्रीज, मोदी केमिकल्स, कात्यायनी इंडस्ट्रीज, तीरथराम गुप्ता थोक मिट्टी तेल विक्रेता, मां विंध्यवासिनी इंजीनियरिंग वर्क्स, एमटेक फेब इंडस्ट्रीज, पैन प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड, दीपक इंजीनियरिंग वर्क्सशॉप, विनर इंजीनियरिंग वर्क्स, हाई फैशन इंडिया, सिंह इंजीनियरिंग वर्क्स, ओम मेटल कैप, यूनाइटेड इंजीनियरिंग, बरनवाल प्लास्टिक, जिरकन इंडिया कॉप, बिट्टू इंजीनियरिंग, एसके फास्टनर, एमआरएसएफ इंडस्ट्रीज, पूर्वांचल उद्योग, गौतम इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज, यशवीर इंडस्ट्रीज, वैभवी टाइल्स, भारत बैटरीज, लक्ष्य होजरी वर्क्स, आयरन फास्टनर, गोयल गियर्स एंड इंजीनियरिंग वर्क्स, स्टार इंजीनियरिंग वर्क्स, जीएमबी वायरनेल, वेल्ड इंडिया, आरती रबर प्रोडक्ट्स, मेसर्स श्याम इंडस्ट्रीज और आरबी इंजीनियरिंग।
आखिरकार गीडा के उद्योगों की प्रदूषण संबंधी श्रेणीवार सूची जारी कर दी गई। गीडा में कुल 33 उद्योग श्वेत श्रेणी के हैं। अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड श्वेत श्रेणी के उद्योगों की बेवजह जांच नहीं कर सकेगा। साथ ही इन उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे श्वेत श्रेणी के उद्योगों को संचालित करने में उद्योगपतियों को लालफीताशाही का सामना नहीं करना पड़ेगा।
आरएन सिंह, उपाध्यक्ष, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज
- उद्योग की बेहतरी और सुविधापूर्ण ढंग से सरकार ने ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ शुरू किया है। इसी क्रम में श्वेत श्रेणी फैक्ट्री को अलग से वर्गीकृत किया गया। पंजाब समेत कई अन्य प्रदेशों में भी उद्योगपतियों को इस सुविधा का लाभ दिया जाता है लेकिन गोरखपुर का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपने ही नियम का उल्लंघन कर रहा था। लंबे अरसे से इसकी मांग कर रहे थे। सूची जारी होने से इस श्रेणी के उद्योगों को राहत मिलेगी।
एसके अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मापदंड के आधार पर गीडा के उद्योगों की श्रेणीवार सूची जारी कर दी गई है। अगर इस श्रेणी के मानकों के हिसाब से फैक्ट्री में कोई परिवर्तन होता है तो फैक्ट्री की श्रेणी बदल जाएगी। विभाग जांच के आधार पर इस श्रेणी में बदलाव कर देगा।
एसबी सिंह, चीफ इंजीनियर, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
2017 में बनी थी उद्योगों की श्वेत श्रेणी
सरकार ने प्रदूषण लोड के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण किया था। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय की ओर से तीन श्रेणियों के अलावा श्वेत उद्योगों की नई श्रेणी बनाई गई थी। प्रावधान था कि श्वेत श्रेणी के उद्योगों को पर्यावरण संबंधी अनापत्ति और मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने औद्योगिक क्षेत्रों का वर्गीकरण प्रदूषण सूचकांक के आधार पर करने का मापदंड विकसित किया है, जो उत्सर्जन, वायु प्रदूषक, प्रवाह जल का प्रवाह उत्पन्न होने वाला खतरनाक कचरा और संसाधनों की खपत को प्रमाणित करता है।
श्रेणी के मानक
- 20 तक प्रदूषण सूचकांक के आंकड़ों वाले औद्योगिक क्षेत्र- श्वेत श्रेणी
- 21 से 40 के बीच प्रदूषण सूचकांक के आंकड़ों वाले औद्योगिक क्षेत्र - हरी श्रेणी
- 41 से 59 के बीच प्रदूषण सूचकांक के आंकड़ों वाले औद्योगिक क्षेत्र - नारंगी श्रेणी
- 60 और उससे अधिक प्रदूषण सूचकांक के आंकड़ों वाले औद्योगिक क्षेत्र- लाल श्रेणी