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चंदू बाबू के जिस बंगले की बाउंड्री पर चढ़ने पर सुरक्षा गार्ड ने किशोर को गोली मारी, उसके निर्माण की वैधता पर ही सवाल

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चंदू बाबू के जिस बंगले की बाउंड्री पर चढ़ने पर सुरक्षा गार्ड ने किशोर को गोली मारी, उसके निर्माण की वैधता पर ही सवाल
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अरुण चन्द
गोरखपुर। गैलेंट इस्पात के एमडी चंद्र प्रकाश अग्रवाल उर्फ चंदू बाबू के जिस आवास की सुरक्षा में तैनात प्राइवेट सुरक्षा गार्ड ने मामूली-सी बात पर पास के रहने वाले किशोर अरविंद चौहान को सोमवार की शाम गोली मार दी, उस आवास की वैधता पर ही सवाल है। इस मामले में जीडीए में प्रचलित वाद का यही संकेत है। जीडीए भू-प्रयोग बदलकर आवासीय करने की अर्जी खारिज कर चुका है। अवैध निर्माण पर जीडीए में वाद दाखिल हैं। हालांकि चंदू बाबू इसे अधूरा सच बताते हैं, वे कहते हैं कि तत्कालीन जीडीए उपाध्यक्ष ने अपनी अधिकार सीमा से बाहर जाकर गलत फैसले लिए। शासन के आदेश पर वे फैसले रिव्यू किए जा रहे हैं।
इस विवाद के बाद कुछ लोगों ने अमर उजाला से संपर्क करके यह जानकारी दी कि गैलेंट इस्पात के एमडी की तरफ से इस जमीन समेत अपनी कुछ और जमीनों का भू-प्रयोग औद्योगिक से बदलकर आवासीय करने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण(जीडीए) में आवेदन कर रखा था, जिसे पूर्व उपाध्यक्ष अमित सिंह बंसल ने 13 जून 2019 को खारिज कर दिया। अब प्राधिकरण प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। जोन के सहायक अभियंता, अवर अभियंता के नेतृत्व में प्राधिकरण की टीम ने 17 जून 2019 को विकास नगर लक्ष्मीपुर स्थित उद्योगपति के घर ‘गैलेंट हाउस’ का निरीक्षण किया। इस दौरान पाया गया कि औद्योगिक भू-प्रयोग वाली जमीन में से 4500 वर्ग मीटर पर विला नंबर एक, दो, तीन, भूतल और प्रथम तल के अलावा स्टॉफ क्वार्टर भूतल, प्रथम तल और द्वितीय तल पर अवैध तरीके से निर्माण करा लिया गया। मौके पर उद्योगपति या उनके घर का कोई भी सदस्य इन निर्माण कार्यों का प्राधिकरण की तरफ से स्वीकृत मानचित्र नहीं प्रस्तुत कर सका। इसपर प्राधिकरण ने पीठासीन अधिकारी प्रथम के वहां वाद दाखिल कर लिया है। साथ ही उद्योगपति को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है। पिछली चार जुलाई को इस मामले में सुनवाई थी, मगर उद्योगपति के अधिवक्ता की तरफ से चंद्र प्रकाश अग्रवाल के धार्मिक यात्रा पर होने की वजह से सुनवाई के लिए एक महीने का वक्त मांगा गया था। पीठासीन अधिकारी ने सुनवाई की अगली 25 जुलाई तय की है।
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महायोजना 2001, 21 में भी जमीन का भू-प्रयोग औद्योगिक
जीडीए की महायोजना 2001 और 2021 में भी उद्योगपति चंद्र प्रकाश अग्रवाल के विकास नगर, लच्छीपुर में बने बंगले का भू-प्रयोग औद्योगिक दर्ज है। इस जमीन पर सिर्फ उद्योग ही लगाया जा सकता है। आवास निर्माण की इजाजत किसी भी सूरत में नहीं मिल सकती है। जीडीए मानचित्र ही नहीं स्वीकृत कर सकता है, मगर यहां एक, दो नहीं बल्कि तीन-तीन विला के साथ इस जमीन पर स्टॉफ क्वार्टर भी बना लिए गए हैं।
गोली चलने की घटना के बाद लौटे उपाध्यक्ष
भू-प्रयोग औद्योगिक से बदलकर आवासीय करने की सिफारिश खारिज होने के बाद उद्योगपति चंद्र प्रकाश अग्रवाल ने जीडीए के अध्यक्ष व कमिश्नर जयंत नार्लीकर के वहां फिर से इस मामले में विचार करने के लिए आवेदन दिया है। उन्होंने निवर्तमान उपाध्यक्ष अमित सिंह बंसल पर भी कई आरोप लगाए हैं। प्राधिकरण सूत्रों के मुताबिक इसी क्रम में जीडीए के उपाध्यक्ष ए. दिनेश कुमार अपने मातहतों के साथ सोमवार की शाम उद्योगपति के विकास नगर आवास का निरीक्षण करने जा रहे थे कि उसी वक्त सुरक्षा गार्ड के गोली चला देने की सूचना मिली, जिसके बाद वह बीच रास्ते से ही लौट आए।
मानचित्र के मुताबिक घर का निर्माण हुआ है। जीडीए में वाद दाखिल होने की कोई जानकारी मुझे नहीं है। ऐसे बहुत से मामले दफ्तर में आते-जाते रहते हैं, होगा भी तो किसी ने देखा होगा। मुझे जानकारी नहीं। भू-प्रयोग बदलने का आवेदन खारिज करने का अधिकार जीडीए उपाध्यक्ष को नहीं है। उसक ा रिव्यू होगा।
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- चंद्र प्रकाश अग्रवाल, एमडी गैलेंट इस्पात
औद्योगिक जमीन का भू-प्रयोग बदलकर आवासीय करने के उद्योगपति चंद्र प्रकाश अग्रवाल का आवेदन खारिज किया जा चुका है। अब इसपर सुनवाई शासन स्तर पर ही हो सकती है। विकास नगर में औद्योगिक भू- प्रयोग वाली जमीन पर अवैध तरीके से निर्माण कराने के मामले में वाद दाखिल कर सुनवाई चल रही है। जो निर्णय होगा उसके मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी-- ए. दिनेश कुमार, उपाध्यक्ष, जीडीए
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