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एडीशनल एसपी बन दरोगा से की जालसाजी, लिए बीस हजार रुपये

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एडिशनल एसपी बन दरोगा से की जालसाजी
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दरोगा की सूचना पर पिपराइच पुलिस ने एक को लिया हिरासत में, कथित एडिशनल एसपी फरार
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर । किसी दरोगा का जालसाजी का शिकार होना चौंकाने वाली बात है। झंगहा थाने में तैनात दरोगा के रविवार की शाम को जालसाजी का शिकार होने की घटना सामने आई। दिलचस्प बात यह कि जालसाज ने खुद को एएसपी बताकर उनसे 20 हजार रुपये की ठगी कर ली। कुछ देर बाद ठगी का शिकार होने की बात समझ में आने के बाद दरोगा ने पिपराइच पुलिस को इसकी सूचना दी। पिपराइच पुलिस ने कार चालक को तो पकड़ लिया, लेकिन जालसाज फरार हो गया।
झंगहा थाने में तैनात एक दरोगा रविवार की शाम को मोतीरामअड़्डा चौराहे पर वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इस दौरान उनके मोबाइल फोन पर रविवार की शाम को अनजान नंबर से फोन आया। दूसरी तरफ से बोलने वाले ने खुद का परिचय गोरखपुर में कार्यरत एएसपी के तौर पर देते हुए दारोगा से तत्काल 20 हजार रुपये लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज चौकी के पास बुलाया। दरोगा वहां पहुंचे तो तथाकथित एएसपी वहां नहीं मिले। फोन करने पर वह दरोगा को कौआबाग रेलवे कॉलोनी के पास सादी वर्दी में बुलाया। दरोगा आनन-फानन में मोहद्दीपुर से रेडिमेड कपड़े खरीदे और उसे पहने। इसके बाद वह मोहद्दीपुर के एक एटीएम से खाते से बीस हजार रुपये निकाले। एक होमगार्ड जवान को साथ लेकर दरोगा बाइक से रेलवे कॉलोनी के पास पहुंच गए। रेलवे कॉलोनी में स्वीफ्ट डिजायर कार सवार एक व्यक्ति मिला। दरोगा से रुपये लेने के बाद उसने, उसके काम की तारीफ की और कार में सवार होकर पिपराइच की तरफ निकल गया।
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तथाकथित एएसपी के जाने के बाद दरोगा को खुद के ठगे जाने का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने पिपराइच थानेदार को फोन कर सारी घटना बताई और कार सवार को पकड़ने का अनुरोध किया। रात में 8.30 बजे के आसपास पिपराइच पुलिस ने कस्बे से चालक सहित स्विफ्ट डिजायर कार तो पकड़ ली, लेकिन जालसाज उसमें मौजूद नहीं था। पूछताछ करने पर चालक ने बताया कि एक व्यक्ति ने रेलवे स्टेशन से पिपराइच के लिए उसकी कार बुक की थी। पिपराइच कस्बे में उसने कार छोड़ दी। जालसाज को तलाश करने का काफी कोशिश की गई, लेकिन उसका पता नहीं चला। पिपराइच इंस्पेक्टर सुधीर सिंह ने बताया कि झंगहा थाने में तैनात दारोगा के साथ ठगी की सूचना पर कार चालक को पकड़ा गया। उसे झंगहा पुलिस के हवाले कर दिया गया है। जालसाज का पता नहीं चल पाया है। उधर, महकमे में इस बात की चर्चा जोरों पर है। लेकिन पुलिस अधिकारी ज्यादा कुछ नहीं बोल रहे हैं। उधर पीड़ित दरोगा भी अब मौन हैं।
किस बात का डर, जो पैसा दे बैठे
अब सवाल उठता है कि दरोगा को किस बात का डर था, जो फर्जी एडिशनल एसपी को 20 हजार रुपये दे बैठे। इस मामले की जांच भी होनी चाहिए।
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