जिला अस्पताल को की गई दवाओं की सप्लाई में जालसाजी का खुलासा हुआ है। यहां पेन किलर के कई रैपर खाली पाए गए हैं। इसका पर्दाफाश तब हुआ जब कई मरीज उसे वापस करने दवा काउंटर पर पहुंचे। दवाओं के ऐसे खाली रैपर काफी समय से अस्पताल में मौजूद हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। यहां तक की स्टोर इंचार्ज को भी इस जालसाजी की जानकारी नहीं हुई।
ऑर्डर मिलने के बाद कंपनी सीधे स्टोर में ही दवाओं की सप्लाई करती है, जबकि नियम यह है कि दवाओं का मिलान और जांच करने के बाद ही उसे काउंटर पर भेजा जाए। मगर ऐसा नहीं हुआ। इस कारण मरीजों को कई दवाओं के खाली रैपर ही दे दिए गए। काउंटर पर भी इस बात का ध्यान नहीं दिया गया। घर पहुंचने केे बाद जब मरीजों ने रैपर खोले तो वह खाली मिली। इसके बाद वह उसे काउंटर पर वापस करने पहुंचे।
यह खेल सिर्फ गोरखपुर में ही हुआ हो, ऐसा नहीं है। चूंकि जिन कंपनियों का उप्र सरकार से करार होता है, वही सरकारी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई करती है। खाली रैपर के बारे में स्टोर इंचार्ज से पूछे जाने पर उन्होंने मामले की जानकारी होने से ही इन्कार कर दिया। अस्पताल प्रशासन की मानें तो उनके पास अभी तक इसकी कोई शिकायत नहीं आई है।
स्टोर में रखे स्टॉक और आई दवाओं की जांच कराई जाएगी। यदि शिकायत सही पाई गई तो दवाओं को वापस कराया जाएगा।
- डॉ. एचआर यादव, एसआईसी