रमजान के पहले जुमा पर शहर की छोटी-बड़ी मस्जिदों में रोजेदारों और नमाजियों की भीड़ उमड़ी। मस्जिदों में मुल्क में अमन की दुआ की गई। महिलाओं ने घरों में नमाज अदा की।
अलसुबह रोजेदारों ने सहरी कर रोजा शुरू किया। कुछ आराम करने के बाद जुमा के नमाज की तैयारी में लग गए। इस मौके पर इबादतगाहों और घरों में साफ-सफाई की गई। लोगों ने गुस्ल कर साफ-सुथरे कपड़े पहने। अजान होने से पहले मस्जिदों का रुख किया, जिससे पहली कतार में जगह मिल जाए। अजान शुरू होने तक मस्जिदें नमाजियों से भर गईं। नमाज के बाद इमाम ने तकरीर पेश की। पहले जुमा की नमाज शहर की छोटी-बड़ी करीब सवा दौ सौ मस्जिदों में कौम-ओ-मिल्लत और मुल्क में अमन-ओ-अमान की दुआओं के साथ पूरी हुई।
नार्मल स्थित मस्जिद हजरत मुबारक खां शहीदए गाजी रौजा मस्जिद, जामा मस्जिद रसूलपुर, जामा मस्जिद रहमतनगर, मस्जिद पुलिस लाइन, मस्जिद खादिम हुसैन तिवारीपुर, काजी जी की मस्जिद इसमाईलपुर, मदीना मस्जिद रेती, मक्का मस्जिद मेवातीपुर, मस्जिद झांऊ खूनीपुर, जामा मस्जिद सौदागार मोहल्ला, चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर, गैसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर, मस्जिद सौदागार बसंतपुर, नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर सहित तमाम मस्जिदों में जुमा की नमाज अदा की गई। नबी-ए-पाक पर सलातो सलाम पेश किया गया।
घरों में महिलाओं ने जानमाजा बिछाया। नमाज अदा कर कुरआन-ए-पाक की तिलावत की। पुरुषों ने भी घर आकर तिलावत और तस्बीह की। इसके बाद इफ्तार की तैयारी शुरू हो गई। लजीज व्यंजन बनने शुरू हुए। पकौड़िया, चिप्स, पापड़, शर्बत, समोसे, फ्रूट चाट से दस्तरख्वान सजाए गए। शाम को असर की नमाज पढ़ी गई। इसके बाद इफ्तारी मुकम्मल हो जाने पर मस्जिदों व पास पड़ोस के घरों में भेजी गई। पूरा दिन कुछ यूं ही इबादत में बीता।
सहरी व इफ्तार में बरतें सावधानी
गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर के पेश इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद ने बताया कि आम लोग सोचते हैं कि रोजा रखने से कमजोर होकर बीमार पड़ सकते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। सहरी व इफ्तारी में अधिक खाने से रोजादार बीमार हो जाता है। लिहाजा सहरी व इफ्तारी के वक्त खाने पीने में एहितयात बरतनी चाहिए। रोजे के दौरान पेट में खाद्य पदार्थों का इतना ज्यादा भी जखीरा न कर लिया जाए कि दिन भर डकारें ही आती रहें और रोजे में भूख प्यास का एहसास ही न रहे।
मदरसा हुसैनिया व गाजी मकतब में तरावीह में कुरआन मुकम्मल
मदरसा दारूल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार में शुक्रवार को तरावीह की नमाज में एक कुरआन शरीफ मुकम्मल हो गया। छठे रोजे और सातवीं तरावीह के दौरान कुरआन शरीफ दिल्ली से आए इंजीनियर हाफिज मोहम्मद अमीर हम्जा ने मुकम्मल किया। उन्होंने पूरी रवानी के साथ कुरआन सुनाया। खत्मे कुरआन शरीफ के मौके पर मुफ्ती अख्तर हुसैन अजहरी मन्नानी ने तरावीह का महत्व समझाया। अंत में सलातो सलाम के बाद अमन-ओ-अमान, खुशहाली और तरक्की की दुआएं मागी गई। आखिर में शीरीनी बांटी गई। इस मौके पर हाजी सैयद तहव्वर हुसैन, हाफिज नजरे आलम कादरी, मो. आजम, सैयद अल्ताफ हुसैन, सैयद फैसल हुसैन, मो. हाशिम आदि मौजूद थे।
गाजी मकतब गाजी रौजा में भी तरावीह नमाज के दौरान एक कुरआन शरीफ मुकम्मल हुआ। तरावीह लखनऊ से आए हाफि ज मोहम्मद शफ ीक ने पढ़ाई। इस मौके पर तकरीर मौलाना अयाज अहमद व मुफ्ती अख्तर हुसैन ने पेश की। फिर सलातो सलाम पेश किया गया। इस मौके पर हाफि ज रेयाज अहमद मौलाना फि रोज, काजी ईनामुरमर्रहमान, सैयद कासिफ मुमताज, मेहरान अली खान, अनवार अहमद, फ रहानुर्रहमान, सुहेल उस्मानी, पप्पू, शीराज, ताबिश आदि मौजूद थे।
बुशरा अबरार ने रखा पहला रोजा
मोहनलालपुर निवासा अबरारुल हक अंसारी व कहकशां की 12 वर्षीय बिटिया बुशरा अबरार ने रमजान के पहले जुमे पर अपना पहला रोजा रखा। कक्षा पांच में पढ़ने वाली बुशरा के लिए सहरी में खास इंतजाम किया गया। गर्मी तेज होने के बावजूद बुशरा ने रोजा, नमाज व तिलावत पूरी की। शाम को रोजा कुशाई की दावत हुई। इसमें लजीज पकवान बने। इस मौके पर बुशरा को खूब दुआएं और तोहफे मिले।