अवैध बालू खनन मामले में सीबीआई ने जिले के जिन दो ठेकेदारों पर केस दर्ज किया है, उसमें एक की छह माह पहले ही मौत हो चुकी है। परिवार के सदस्यों से पूछताछ में सामने आया कि पिता के नाम पर ठेका कोई और चलाता था। अब सीबीआई उसे भी रडार पर लेने की तैयारी में है। इनके अलावा उन लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है, जो पट्टों के समय जिला खनन कार्यालय में तैनात रहे।
वर्ष 2012-13 में हुए खनन पट्टों के नवीनीकरण में सीबीआई ने अनियमितता पकड़ी है। अभिलेखों की जांच में सामने आया है कि तत्कालीन डीएम विवेक और एडीएम देवीशरण उपाध्याय ने हाईकोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर पट्टों का नवीनीकरण कर दिया। तत्कालीन खनन निरीक्षक पंकज कुमार सिंह ने फार्म-11 को गलत तरीके से जारी किया।
इन आरोपों में सीबीआई ने बुधवार को तत्कालीन डीएम, एडीएम, खनन अधिकारी के अलावा ठेकेदार रामपुर कारखाना के शाहजहांपुर निवासी शारदा यादव और बरईपार राव निवासी फूलबदन निषाद के खिलाफ केस दर्ज किया है। शारदा और फूलबदन को गंडक नदी में अलग-अलग घाटों पर खनन का ठेका वर्ष 2009 में तीन वर्ष के लिए आवंटित किया गया था। तय अवधि बीतने के बाद दोनों ही ठेकेदारों ने अफसरों से मिलीभगत कर नियम विरुद्ध ढंग से नवीनीकरण कराकर बालू खनन से राजस्व को क्षति पहुंचाई।
करीब छह साल पुराने मामले में केस दर्ज करने के बाद बुधवार को जांच के लिए जिले में आई सीबीआई ने दोनों ठेकेदारों के घर पर छापामारी की थी। दो वाहनों से पांच की संख्या में सीबीआई के अफसर शाहजहांपुर में शारदा यादव के घर पहुंचे तो पता चला कि करीब छह माह पूर्व ही शारदा यादव की मौत हो चुकी है। खनन का काम वही करते थे।
घरवालों ने कारोबार के बारे में किसी तरह की जानकारी से असमर्थता जताई। यह जरूर बताया कि खनन कारोबार में देवरिया के एक शख्स भी पिता के साथ रहते थे। उनसे कुछ जानकारी मिल सकती है। करीब एक घंटे तक घर खंगालने के बाद लौटी सीबीआई टीम अब इस शख्स की तलाश में जुट गई है। उधर, बरईपार राव में फूलबदन निषाद के घर पहुंची सीबीआई ने पूछताछ के बाद कई दस्तावेज भी जुटाए।
चार घंटे बाद लौटी टीम ने भविष्य में फिर पूछताछ की बात कही है। सीबीआई की इस कार्रवाई से जिले के खनन कारोबारियों में खलबली मची हुई है। उधर, खनन विभाग में भी हड़कंप की स्थिति है। सीबीआई की एफआईआर में उल्लेख है कि नवीनीकरण के दौरान कार्यालय के कुछ लोगों की भूमिका भी संदिग्ध है। इन लोगों को अज्ञात के रूप में मुकदमे में शामिल किया है। ऐसे में कार्रवाई की जद में आने की आशंकाओं से विभागीय कर्मचारी भी सहमे हुए हैं।