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सिकंदर से शुरुआत, सैराट से हुआ समापन

Mon, 27 Mar 2017 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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फिल्‍म फेस्टिवल में फिल्म देखते लोग। - फोटो : Amar Ujala
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प्रख्यात अभिनेता ओमपुरी की याद में और दलित-आदिवासी संघर्ष पर केंद्रित 12 वें गोरखपुर फि ल्म फेस्टिवल के दूसरे और आखिरी दिन की शुरुआत सई परांजपे की बाल फिल्म सिकंदर से हुई। दोपहर के सत्र में मीडिया संस्थानों के कारपोरेट होने के चलते आ रहे बदलाव और नए प्रयोगों पर वरिष्ठ पत्रकार पंकज श्रीवास्तव और फि ल्मकार नकुल सिंह साहनी ने अपनी प्रस्तुति दी।
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फिल्म सिकंदर की कहानी उस जगह से शुरू होती है जहां चार किशोर रहते हैं। भिन्न आर्थिक परिवेश के बावजूद अपनी मस्ती और दोस्ती में ये एक हैं। एक दिन खेलते हुए उन्हें पिल्ला मिलता है जिसे वे अपने नामों के प्रथम अक्षर से निर्मित हुआ नाम सिकंदर देते हैं। पूरी फिल्म बच्चों द्वारा सिकंदर को एक घर दिलाने की जद्दोजहद पर आधारित है, जिसमें वे अंतत: सफ ल होते हैं। मशहूर बाल कलाकार विनी जोगेलकर के अलावा कुलभूषण खरबंदा और शेट्टी का अभिनय भी इस रोमांच कथा को रोचक बनाता है।

इसके बाद नए जमाने की गीत खंड में चमार गिन्नी माही और चमार पॉप को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया गया है। सिनेमा तकनीक में आए क्रांतिकारी बदलाव के कारण अब हर समाज की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति देखने-सुनने को मिल रही है। पंजाब की नई सामाजिक सरंचना में निर्मित हुई 17 वर्षीय गिन्नी माही और उसके चमार पॉप को सुनना एक नए अनुभव संसार में जाने जैसा है।
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दोपहर के सत्र में 1986 की बनी जान अब्राहम निर्देशित मलायलम फि ल्म अम्मा अरियन  दिखाई गई। केरल के नक्सलवादी राजन के एनकाउंटर पर बनी इस फिल्म को दर्शकों ने खूब सराहा। इस फ़िल्म को दिल्ली के अंबेडकर विश्वविद्यालय के शिक्षक सिबिल के विनोदन ने प्रस्तुत किया। समापन चर्चित मराठी फि ल्म सैराट से हुआ। नागराज मंजुले निर्देशित यह फिल्म एक दलित युवा की सवर्ण युवती से प्रेम कहानी है जिसके जरिए वह समाज का एक और सच हमारे सामने रखते हैं। फेस्टिवल में दो छोटी फि ल्में ‘स्काई अंडर द रूफ’ और ‘अग्निशिखा’ भी दिखाई गई। निर्देशक जोसफ  की ‘स्काई अंडर द रूफ’ मुंबई के विमानतल परिसर रहिवाशी एकता संघ की लड़ाई का साथ देने के लिए एकता संघ द्वारा बनायी गई है। ‘अग्निशिखा’ रमाकंवर हत्याकांड की वीडियो टेस्टीमनी है जिसे प्रतिरोध का सिनेमा अभियान से जुड़े युवा फिल्मकार सौरभ कुमार ने निर्मित किया है।

मीडिया में मोनोपोली सबसे बड़ा खतरा : पंकज श्रीवास्तव
मीडिया विजिल के संस्थापक संपादक पंकज श्रीवास्तव ने खबराें की प्रस्तुति में मीडिया संस्थानों के बढ़ते कारपोरेट कल्चर की चर्चा करते हुए कहा कि आज समूचे भारतीय मीडिया जगत पर गिने-चुने बड़े पूंजीपतियों का कब्जा हो गया है। इससे जनता के मुद्दे मुख्य धारा की मीडिया से गायब होते जा रहे हैं और उसकी जगह नकली बहस प्लांट की जा रही है। इसके बाद फि ल्मकार और चल चित्र अभियान के संचालक नकुल सिंह साहनी ने दर्शकों से अपने विचार साझा किए।
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