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क्षेत्रीय भाषाओं की मजबूती के लिए बनेगी हिंदुस्तानी एकेडमी : सीएम

Mon, 27 Mar 2017 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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गोरखनाथ्‍ा मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद आदित्यनाथ व अन्य। - फोटो : Amar Ujala
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मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने कहा कि दुनिया में भारत की पहचान आध्यात्म और विशिष्ट ज्ञान से है। यहां के संतों की विशिष्ट परंपरा में गोरक्षपीठ की अहम भूमिका है। ऋषियों, मुनियों की तमाम बातों का उल्लेख क्षेत्रीय भाषाओं में मिलता है। उसकी मजबूती के लिए ‘हिंदुस्तानी एकेडमी’ का गठन किया जाएगा। इसके माध्यम से ऋषियों, मुनियों की परंपरा को आमजन तक पहुंचाया जाएगा।
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योगीराज बाबा गंभीरनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित शताब्दी समारोह के समापन अवसर पर उन्होंने कहा कि गंभीरनाथ महान संत थे। उन्होंने गुरु गोरखनाथ की परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्हें इस संसार को त्यागे सौ साल हो गए, पर उनकी और उनकी परंपरा की चर्चा आज भी संपूर्ण भारत में होती है। योगी व संत की ताकत का जिक्र करते हुए उन्होंने सिकंदर और अकबर का उदाहरण दिया। कहा कि बड़े लोग झुक जाते हैं पर योगी और संत कभी नहीं झुकते। सिकंदर विश्व विजेता बनने के लिए जब भारत आया तो उसने सिंधु नदी पर डेरा डाला। उसे जब पता चला कि वहां एक योगी रहता है तो उसका सेनापति उसके पास गया और बोला उन्हें विश्व विजेता बुला रहे हैं। उस योगी ने कहा कि वह विश्व विधाता के सिवाय किसी विश्व विजेता को नहीं जानता। जिस धरती पर उन्होंने जन्म लिया, उसका विश्व विजेता कोई नहीं हो सकता। उन्होंने एक और उदाहरण दिया, अकबर के समय तुलसी दास जन जागरण कर रहे थे। अकबर के दूत ने उनके पास जाकर कहा, दिल्ली के राजा उन्हें बुला रहे हैं। तब तुलसी दास ने कहा था उनके एक ही राजा हैं और वह हैं श्रीराम। योगी ने इसके माध्यम से यह भी संकेत देने की कोशिश की कि वह भी योगी हैं और किसी के दबाव में झुकेंगे नहीं।

अयोध्या के दिग्विजय अखाड़े के महंत सुरेश दास ने कहा कि अयोध्या में अब श्रीराम का मंदिर बनने से कोई नहीं रोक सकता। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि बातचीत के लिए हम तैयार हैं लेकिन मंदिर श्रीराम जन्म भूमि पर ही बनेगा, मस्जिद नहीं। अगर जरूरत पड़ी तो राज्यसभा में पूर्ण बहुमत होने के बाद सोमनाथ की तर्ज पर विधेयक लाकर श्रीराम मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। मुख्य वक्ता पूर्व मंत्री हृदयनाथ दीक्षित ने कहा कि गोरक्षपीठ अपनी परंपरा के कारण दुनिया में जानी जाती है। भारत के आध्यात्म के बारे में जिसे जानना हो, उसे गोरखपुर की तरफ आना होगा। गोरखनाथ के अद्वैत के माध्यम से योग को भारत में ही नहीं विदेशों में भी पहचाना गया। गंभीरनाथ ने गुरु गोरखनाथ की परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य किया।
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इस अवसर पर गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति पृथ्वीश नाग और प्रो. यूपी सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राज शरण शाही ने किया। इस अवसर पर रिटायर्ड जज केडी शाही, सांसद शिव प्रताप शुक्ल, जगदंबिका पाल, रवींद्र कुशवाहा, नगर विधायक आरएमडी अग्रवाल, मेयर डॉ. सत्या पांडेय आदि मौजूद रहीं।
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