पुलिस ने 15 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट
गोरखपुर। फर्जी लाइसेंस के जरिये शस्त्र हासिल करने के सनसनीखेज मामले में दर्ज केस की विवेचना पूरी हो चुकी है। पुलिस ने मंगलवार को इस मामले में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। अब पुलिस आरोपियों पर रासुका लगाने की सिफारिश भी करेगी। पुलिस के अनुसार जिन लोगों को जेल भेजा गया है, चार्जशीट में उनके ही नाम शामिल किए गए हैं।
14 अगस्त को फर्जी लाइसेंस पर असलहा रखने वाले गोरखनाथ इलाके के तनवीर के पकड़े जाने के बाद पूरा मामला खुलकर सामने आया था। तब संदेह यही था कि कुछ लोगों ने ही ऐसा किया होगा और फिर तत्कालीन असलहा बाबू राम सिंह की तहरीर पर पुलिस ने रवि आर्म्स कार्पोरेशन के प्रोपराइटर, कैंट निवासी शिवम मिश्रा, राप्तीनगर के विकास तिवारी और तनवीर के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया था। विस्तृत जांच के लिए जब पुलिस प्रशासन की तरफ से एसआईटी गठित की गई तो परत दर परत मामला खुलकर सामने आने लगा। कई बड़े लोगों के नाम उजागर हुए और जेल भी भेजे गए, लेकिन इसी बीच एसआईटी प्रभारी रहे आईपीएस बोत्रे रोहन प्रमोद के तबादले के बाद से ही मामले की जांच पूरी तरह से ठप पड़ी है। उनके जाने के बाद से एक भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस अब तक 24 लोगों को इस मामले में जेल भेज चुकी है। इंस्पेक्टर कैंट रवि राय ने बताया कि विवेचना पूरी कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दिया गया है।
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इनके खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट
आयुध लिपिक राम सिंह, तनवीर, प्रापर्टी डीलर विजय प्रताप, गोपी उर्फ शमशेर, विकास तिवारी, ढाबा संचालक प्रणय प्रताप, प्रापर्टी डीलर शमशाद, रवि आर्म्स कारपोरेशन का संचालक रवि पांडेय, पूर्व असलहा बाबू अशोक गुप्ता, संविदा कर्मचारी अजय गिरी, पूर्व असलहा बाबू विजय प्रकाश श्रीवास्तव, मो. आजम लारी, अशफाक और शाहिद के नाम शामिल हैं।
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बेगुनाहों को राहत, चार्जशीट में नाम नहीं
गोरखपुर। फर्जी शस्त्र मामले में ही एक साथ खोराबार से जेल भेजे गए डॉक्टर, आबकारी सिपाही, ट्रेजरी कर्मचारी और रिटायर शिक्षक समेत दस बेगुनाहों को बड़ी राहत मिली है। चार्जशीट में पुलिस ने उनका नाम नहीं डाला है। पुलिस इन सभी की जांच अलग से कर रही है और अब प्रशासन को पत्र लिखकर फिर से उनके अभिलेखों की पड़ताल करेगी। बता दें कि जिला प्रशासन ने यह स्वीकार किया है कि खोराबार से एक साथ जेल भेजे गए सभी 10 लोगों के लाइसेंस से जुड़ी मूल पत्रावली मिल गई है और सभी के लाइसेंस सही हैं। इनमें से सात को एडीएम सिटी की तरफ से मूल पत्रावली की सत्यापित कॉपी भी जारी की जा चुकी है।
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जिन पर संदेह, उन्हीं के असलहा लाइसेंस का होगा सत्यापन
- नोटिस भेजकर साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय देगा प्रशासन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। जिले के सभी 22 हजार शस्त्र लाइसेंसधारी नहीं बल्कि जिन पर संदेह है प्रशासन उन्हीं के लाइसेंस का सत्यापन कराएगा। इसके लिए उन्हें जिला प्रशासन की तरफ से नोटिस भेजकर साक्ष्य प्रस्तुत करने का मौका दिया जाएगा। सही साक्ष्य नहीं उपलब्ध करा पाने पर ही संबंधित का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।
14 अगस्त को फर्जी शस्त्र लाइसेंस का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद जहां पुलिस ने एसआईटी जांच गठित की थी, वहीं डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रथमेश कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मजिस्ट्रेटी जांच कमेटी गठित की थी। एक महीने से अधिक समय तक सभी शस्त्र लाइसेंसों की पत्रावलियों के सत्यापन के बाद रिपोर्ट तैयार कर कमेटी ने पिछले महीने नौ अक्तूबर को डीएम को जांच रिपोर्ट सौंपी थी। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक जांच में करीब तीन सौ ऐसे लोग चिह्नित किए गए हैं जिनके नाम या लाइसेंस संख्या आदि पर अभिलेखों में छेड़छाड़ की गई है। मसलन कहीं ओवरराइटिंग हुई है तो कहीं सफेदा लगा है। जिला प्रशासन इनके लाइसेंस संदिग्ध मान रहा है, लेकिन यह दावा नहीं कर रहा कि वे फर्जी हैं। यही वजह है कि सभी को नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
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पुलिस दो महीने से करा रही सत्यापन
पुलिस की तरफ से एहतियातन संबंधित थाना क्षेत्रों के शस्त्र लाइसेंसधारियों के लाइसेंसों का सत्यापन कराया जा रहा है। एडीएम सिटी राकेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस के मामले में पुलिस और जिला प्रशासन अलग-अलग जांच कर रही है। प्रशासन ने मजिस्ट्रेटी जांच कराई है जबकि पुलिस एसआईटी जांच के साथ ही संबंधित थानों के लाइसेंसधारियों के लाइसेंस की फोटो कॉपी और फोटो मंगाकर उनका सत्यापन भी करा रही है।
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कोट-
जिले के सभी 22 हजार शस्त्र लाइसेंसों का सत्यापन नहीं होगा। जिला प्रशासन की मजिस्ट्रेटी जांच में जो लाइसेंस संदिग्ध मिले हैं, मसलन फाइल में जिनके नाम, लाइसेंस संख्या आदि पर ओवरराइटिंग या फिर उन्हें खुरचने की कोशिश की गई है, उन्हीं के लाइसेंस का सत्यापन होगा। इनकी संख्या बहुत ज्यादा नहीं है। सभी को नोटिस जारी कर साक्ष्य सहित जवाब देने का मौका दिया जाएगा। साक्ष्य नहीं प्रस्तुत कर पाने वालों पर ही कार्रवाई होगी।
- राकेश कुमार श्रीवास्तव, एडीएम सिटी व सदस्य मजिस्ट्रेटी जांच कमेटी