शस्त्र बिक्री के समय ही पर्ची जांचते तो नहीं होता फर्जीवाड़ा
गोरखपुर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस के सनसनीखेज मामले की अब तक की हुई मजिस्ट्रेटी जांच में रवि गन हाउस ही नहीं शहर की चार और शस्त्र दुकानों से फर्जी लाइसेंस पर शस्त्र बेचे जाने का खुलासा हुआ है। अब सवाल यह उठता है कि जब रोजाना की शस्त्र बिक्री के ब्यौरे से जुड़ी पर्ची, दुकान मालिक की ओर से कलेक्ट्रेट भेजी जाती थी तो उसका सत्यापन कितनी गंभीरता से होता था। पर्ची पर दर्ज लाइसेंस नंबर और असलहे की पूरी जानकारी, कलेक्ट्रेट के शस्त्र अनुभाग के रजिस्टर से मिलाने का प्रावधान है। इसके बाद सूचना एसएसपी दफ्तर को भेजनी होती है। अगर इस पर्ची को शस्त्र अनुभाग के कर्मचारी, विभाग के रजिस्टर से मिलाते तो शायद पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे ही इतना बड़ा फर्जीवाड़ा नहीं हो पाता।
यही नहीं, शस्त्र दुकानों के नियमित सत्यापन का भी नियम है, मगर संबंधित सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस के अफसर ये सत्यापन भी कागजों में ही करते रहे और उन्हें फर्जी लाइसेंस पर शस्त्र बिक्री होने की भनक तक नहीं लग सकी। मजिस्ट्रेटी जांच के सदस्य एवं ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रथमेश कुमार का कहना है कि जांच में फर्जी लाइसेंस के मामले में रवि गन हाउस के साथ ही चार और शस्त्र की दुकानों के नाम सामने आ रहे हैं। दुकानों से मिले दस्तावेजों की जांच के बाद 10 से 15 लाइसेंस ऐसे पाए गए हैं, जिनके रिकार्ड कलेक्ट्रेट के रिकार्ड से नहीं मिल रहे हैं। प्रशासन इन सभी लाइसेंस को फर्जी मान रहा है। साथ ही संबंधित गन हाउस के मालिकों पर भी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।