फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में बेगुनाहों के नाम मुकदमे से बाहर निकाले जाएंगे : डीएम
गोरखपुर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में खोराबार से एक साथ 10 लोगों को जेल भेजने के मामले में अब जिला प्रशासन ने भी पूरी तरह से मान लिया है कि वे बेगुनाह थे। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि इनमें से सात शस्त्र लाइसेंसधारियों के मूल अभिलेख कलेक्ट्रेट में मिल गए हैं। जांच में सभी के लाइसेंस सही मिलने पर पुलिस को लिखा गया है कि वे संबंधित के नाम केस से बाहर कर जल्द चार्जशीट दाखिल करें।
इन बेगुनाहों को जेल भेजे जाने के लिए दोषी कौन के सवाल पर उनका कहना था कि एक ही नंबर के दो लाइसेंस समेत कुछ अन्य गड़बड़ियों पर विस्तृत जांच जरूरी थी। इसीलिए पुलिस ने संबंधित पर सिर्फ आर्म्स एक्ट में कार्रवाई की थी। अब सभी के मूल दस्तावेज मिल गए हैं तो किसी भी बेगुनाह पर कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी। मामले में फंसे कोषागार कर्मचारी राम निवास यादव का निलंबन रद कर उन्हें बहाल कर दिया गया है।
कार्रवाई के दस्तावेज के मुताबिक खोराबार कुई बाजार निवासी विनोद कुमार, जर्दा गांव के भैंसहा टोला निवासी जगदीश शुक्ला, जंगलसिकरी निवासी मोहम्मद बिन कासिम, छपरा गांव निवासी रामहित यादव, मिर्जापुर निवासी राम आशीष, जंगल रामलखना निवासी विजय प्रताप सिंह, जंगल चौरी टोला शेख निवासी महताब आलम, रायगंज बाजार निवासी राम चन्द्र, नवां अव्वल निवासी राम नयन और राम निवास यादव निवासी जंगलचौरी को फर्जी शस्त्र लाइसेंस के आधार पर हथियार रखने के आरोप में जेल भेजा गया था।
इनमें रामहित यादव, रामअशीष और जगदीश शुक्ला को छोड़कर बाकी सात लोगों को जिला प्रशासन की तरफ से कलेक्ट्रेट में मौजूद शस्त्र लाइसेंस की मूल पत्रावली की सत्यापित नकल भी दी जा चुकी है।