बाले मियां के मेले पर चादर चढ़ाने जाते जायरीन।
- फोटो : Amar Ujala
हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक हजरत सैयद सालार मसऊद गाजी मियां रहमत उल्लाह अलैह उर्फ बाले मियां के मेले के मुख्य दिन रविवार को बहरामपुर स्थित आस्ताने पर भारी संख्या में जायरीन उमड़े। इस मौके पर दरगाह का गुस्ल परंपरागत चादरपोशी हुई और कुरआनख्वानी की गई। इसके बाद जायरीन ने आस्ताने पर चादर चढ़ाकर अमन-चैन की दुआ मांगी और नजराना-ए-अकीदत पेश कर भाईचारे का संदेश दिया।
मेले में अकीदतमंदों ने खाने-पीने, घरेलू सामानों, खिलौनों आदि की दुकानों के साथ ही छोटे-बड़े झूले, जादू, लजीज व्यंजन का जमकर मजा लिया। महिलाएं सौंदर्य प्रसाधन और गृहस्थी के सामान खरीदने में मशगूल दिखीं। पुरुषों ने भी अपनी जरूरत के सामान खरीदे। कव्वालियों की मधुर धुनें लोगों को सूफ ी मिजाज में रंग रही थी। जात-पात मजहब के सारे बंधन टूटते नजर आएं। सभी की ख्वाहिश थी पहले दर्शन फि र मनोरंजन। जगह-जगह स्टाल लगाए गए थे, जहां तमाम स्वयंसेवी संस्थाओं के वालंटियर लोगों की मदद को तत्पर दिखे। हर साल जेठ के महीने में यहां मेला लगता है, जिसमें आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूरदराज से भारी संख्या में जायरीन आते हैं। मेला परिसर अब पूरे महीने आबाद रहेगा। जिला प्रशासन ने भी इसे लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। मेले की निगरानी कैमरों के जरिए की जा रही है।
पूरी की लगन की रस्म
एक माह तक चलने वाले मेले के मुख्य दिन रविवार को जायरीनों ने लहबर व कनूरी चढ़ाई। पलंग-पीढ़ी देर रात उठी। इसमें जायरीन और अकीदतमंद नाचते-गाते आस्ताने पर पहुंचे और लगन की रस्म पूरी की। जिन लोगों की मन्नत पूरी हो गई थी, उन्होंने मन्नत उतारी। लोगों ने चने की दाल, अखियां, मुर्गा, चावल आदि पकाकर फातिहा दिलाई।
सुबह से रात तक कम न हुई भीड़
आस्ताने पर लोगों की लंबी लाइन सुबह से ही लग गई थी। देर रात तक यहां आने वाले लोग मन्नतें मांगते रहे। आस्ताने पर देश में शांति खुशहाली की दुआएं मांगी गईं।