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विश्व विख्यात कथा वाचक साध्वी आस्था भारती बोलीं-शिक्षा-दीक्षा से ही मिटेगा ‘मानसिक प्रदूषण’

Sun, 08 Dec 2019 11:03 AM IST
विजय जैन विवेक सिंह, गोरखपुर
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विश्व विख्यात कथा वाचक साध्वी आस्था भारती से विशेष बातचीत। - फोटो : अमर उजाला
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कन्या भ्रूण हत्या, आतंकवाद, भ्रष्टाचार, बेटियों से अमानवीयता और परिवारों के टूटने जैसी घटनाएं मीडिया से पता चलती हैं। इन घटनाओं की चर्चा सब करते हैं मगर जड़ में कोई जाना नहीं चाहता। दरअसल, इन घटनाओं के पीछे मनुष्य का ‘प्रदूषित दिमाग’ है। मन दूषित हो तो समाज भी प्रदूषित होता है। ब्रह्मज्ञान से इस दिमागी ‘प्रदूषण’ को रोका जा सकता है। यह कहना है कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की विश्वविख्यात कथावाचक और आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी आस्था भारती का।
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साध्वी आस्था भारती ने भागवत कथा शुरू से एक दिन पहले तारामंडल स्थित दिव्य ज्योति संस्थान के आश्रम में अमर उजाला संवाददाता विवेक सिंह से विशेष बातचीत की। साध्वी ने कहा कि शिक्षा और दीक्षा से ही मानसिक प्रदूषण को दूर किया जा सकता है। चंपादेवी पार्क में 8-14 दिसंबर के बीच होने वाली भागवत कथा के दौरान शिक्षा के साथ ही दीक्षा का उजियारा फैलाया जाएगा।
 
सवाल: शिक्षा का सही रूप क्या होना चाहिए?
जवाब: आपको बताएं, अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर करने में शिक्षा सहायक होती है। अगर इसमें दीक्षा को भी जोड़ दिया जाए तो ये शिक्षा आत्मिक उन्नति की ओर ले जाती है। दीक्षा का काम ही आत्मिक स्वरूप को जागृत करना होता है। भगवान को देखना है तोे वो बिना गुरु के नहीं हो सकता। गुरु ही आपको वह दृष्टि देता है, जिससे परमात्मा के दर्शन होते हैं। ज्ञान रूपी सूर्य कथाएं, कथा व्यास बहुत हैं। ग्रंथ और पुराण भी। मगर हमारे गुरु आशुतोष महाराज ने इन कथाओं को ऐसे तैयार किया है, जो दुखी इंसान और समाज की समस्याओं का निवारण करती है। पूरा समाज हमारा घर है, इसे साफ रखना सभी लोगों का उत्तरदायित्व है। ब्रह्मज्ञान वो शिक्षा है, जो मन में छिपे अंधकार को ज्ञान रूपी प्रकाश से दूर करती है।
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सवाल: युवा आध्यात्म से दूर हैं, क्या आप भी ऐसा मानती हैं?

विश्व विख्यात कथा वाचक साध्वी आस्था भारती से विशेष बातचीत। - फोटो : अमर उजाला
जवाब: ऐसा नहीं है। युवा भी अध्यात्म से जुड़े हैं।  हां, बड़ा तबका ऐसा है, जो दूरी बनाए हुए है। आज की युवा पीढ़ी धर्म और आध्यात्म में फर्क नहीं कर पा रही है। जब आप मंदिर जाएंगे तो पूजा करेंगे। आरती करके प्रसाद चढ़ाएंगे। तीज त्योहारों पर उपवास करते हैं। मगर ये सब क्यों किया जाता है, इसका जवाब ज्यादातर युवाओं के पास नहीं है। उन्हें ये अंधविश्वास लगता है। आध्यात्म कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि पूरी तरह से वैज्ञानिकता से भरा हुआ है। मैं, गोरखपुर के युवाओं से कहती हूं कि वे भागवत कथा सुनें। उन्हें ब्रह्मज्ञान मिलेगा।

सवाल: धर्म को किस रूप में देखती हैं?
जवाब: आप जानते हैं। धर्म अंधविश्वास नहीं, विज्ञान है। जिस दिन यह बात सबको समझ में आ जाएगी, उस दिन आपराधिक घटनाएं नहीं होंगी। भगवा वस्त्र को कुछ लोगों ने बदनाम किया है। वास्तव में यह मानव सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। गुरु जी (आशुतोष महराज) कहते थे कि जीवन में सबकुछ त्यागने वाले को भगवा वस्त्र मिलता है। इसके जरिए दिव्य ज्ञान फैलाया जा सकता है।

 सवाल: आपकी भागवत कथा दूसरों से अलग कैसे है?
जवाब: ‘मंदिर मंदिर मूरत तेरी, अजहुं न देखी सूरत तेरी’ जिस भगवान की बातें बचपन से सुनी है। मूरत देखी है, आरती की, पूजा की है। मगर अंतरघट में उसकी सूरत नहीं देखी है। ये कथा उस परमात्मा परमेश्वर का लोगों को दर्शन कराएगी। जब तक जीवन में गुरु नहीं होगा तब तक आप को ब्रह्मज्ञान नहीं हो सकता है। गोरखपुर में आयोजित होने वाली कथा जन-जन को जागृत करने का काम करेगी।
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