पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि महंत अवेद्यनाथ के आह्वान पर गंगा और तिरंगा के खातिर मैंने अपने आप को न्योछावर कर दिया। मैंने अपने दरवाजे से बरात लौटा दी। महंत अवेद्यनाथ से दीक्षा लेना चाहती थी पर नहीं ले पाई। विजया राजे सिंधिया मेरी मां की तरह थीं। उनके कहने पर अमरकंटक में जाकर दीक्षा ली। अवेद्यनाथ को अपना गुरू और आदर्श मानती हूं। ऐसा संत नहीं देखा। वह वायु की तरह शीतल थे।
उमा भारती ने बताया कि 1992 में जब उन्होंने सन्यास लिया तब वे दूसरी बार सांसद थीं। महंत अवेद्यनाथ ने कहा था कि उनके वहां स्त्री-पुरुष दोनों को समान सम्मान मिलता है। योगी आदित्यनाथ जब पहली बार सांसद बने थे तब वह कम उम्र के थे और मैं अटल सरकार में मंत्री थी। योगी आदित्यनाथ अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर आते थे। कहा कि गंगा जीवन की धारा है, वह अविरल निर्मल बहती रहे इसके लिए उन्होंने प्रयास किया है। उसकी राह में रोड़े को हटाने के लिए प्राणों का बलिदान भी देना पड़े तो वह दे देंगी। योगी के नेतृत्व में अविरल निर्मल गंगा बहती रहेगी।
उमा ने बताया कि जब योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय हुआ तो सबसे पहले उन्हें सूचना मिली। वह खुशी से झूम उठीं। खबर सुन उन्होंने कहा था कि योगी का मुख्यमंत्री बनना वामपंथियों के मुंह पर तमाचा होगा। बोलीं कि आज प्रदेश जिस तेजी से विकास के पथ पर बढ़ रहा है, कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश बन कर रहेगा। अब मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ेगी। जहां रामलला विराजमान हैं वहां मंदिर अवश्य बनेगा।