मरीज काे हाथ से पंखा झलती महिला।
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जिस इंसेफेलाइटिस को लेकर शासन से प्रशासन तक हाय तौबा मचा है, उसी की इमरजेंसी की एसी बीते तीन दिनों से खराब है। गर्मी से मरीज और तीमारदार तो बेहाल है। डॉक्टर भी किसी तरह मरीजों का इलाज कर रहे हैं। व्यवस्था से तंग होकर बृहस्पतिवार को एक तीमारदार मरीज को लेकर प्राइवेट अस्पताल चले गए।
इंसेफेलाइटिस के इमरजेंसी (एल केबिन) की एसी तीन दिन पहले खराब हो गई। जबकि अभी कुछ दिन पहले ही इस वार्ड की एसी बनाई गई थी। जिम्मेदारों का तर्क है कि वार्ड की एसी का वारंटी खत्म होने की वजह से इसे बनवाने में दिक्कत आ रही है। मगर तीन दिन से गर्मी के चलते मरीजों की सांसत बढ़ती जा रही है। यही नहीं वार्ड नंबर बारह में भर्ती एक मरीज को तो तीमारदार सिर्फ इसलिए प्राइवेट अस्पताल लेकर चला गया कि डॉक्टर इलाज में ही लापरवाही बरत रहे थे।
कुशीनगर के नैतिक ठाकुर का वार्ड 12 के बेड नंबर 42 पर उपचार चल रहा था। शुक्रवार को तीमारदारों से डॉक्टर ने बदसलूकी की। वार्ड में भीषण गर्मी और डॉक्टर की बदसलूकी से नाराज तीमारदार मरीज को लेकर प्राइवेट अस्पताल चले गए। डिस्चार्ज करते समय डॉक्टरों ने उनसे एक कागज पर यह भी लिखवा लिया कि मौत होने पर जिम्मेदार खुद होंगे।
‘सेंट्रल एसी लगी है जिसका कंप्रेसर खराब हो गया है। इंजीनियर बुलाए गए हैं जो काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि कल तक एसी चालू हो जाएगी’
प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
इंसेफेलाइटिस से एक और की मौत
बीते 24 घंटे के भीतर एक और मरीज की इंसेफेलाइटिस से मौत हो गई। वहीं 18 नए मरीज भर्ती किए गए हैं। उपचार के दौरान बड़हलगंज की डाली (15) पुत्री रामा की मौत हुई है। गोरखपुर के छह, महराजगंज का एक, देवरिया एक, सिद्धार्थनगर चार, कुशीनगर एक, बिहार के पांच मरीज भर्ती किए गए। जनवरी से अब तक 603 मरीज आ चुके है जिसमें से 152 की मौत हो चुकी है।