शहर की बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए बिजली विभाग ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। उसने इसे जून तक दुरुस्त करने का लक्ष्य बनाया है। इसके लिए स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्वीजिशन) योजना के तहत 98 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। रिलायंस इलेक्ट्रिक वर्क्स को यह जिम्मेदारी दी गई है। इस योजना के तहत न सिर्फ शहर के जर्जर तार और पोल बदले जाएंगे, बल्कि 104 ट्रांसफॉर्मर भी लगाए जाएंगे।
दरअसल स्काडा दूर बैठे बिजली व्यवस्था की निगरानी और उस पर नियंत्रण करने की व्यवस्था है। हालांकि इसका सबसे बड़ा फायदा बिजली की आपूर्ति में सुधार करना है। इसमें लो-वोल्टेज, बिजली कटौती, लोकल फॉल्ट को कम करना शामिल है। इस व्यवस्था से सभी सब-स्टेशन, ट्रांसफॉर्मर आदि पर बिजली की खपत पर निगरानी संभव हो सकेगी। इसके लागू होने के बाद लाइन लॉस, बिजली चोरी आदि पर लगाम लग जाएगी। बिजली के जर्जर तार भी लाइनलॉस की बड़ी वजह हैं। इसलिए बिजली के जर्जर तारों को बदला जाएगा। जहां बिजली के खंभे कम हैं, वहां खंभे लगाए जाएंगे। पुराने खंभे बदले जाएंगे। लो-वोल्टेज वाले इलाकों में नए ट्रांसफॉर्मर लगा कर इस समस्या को दूर कर दिया जाएगा।
गोरखपुर शहर में स्काडा योजना के तहत तकरीबन 98 करोड़ रुपये की लागत से आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके तहत शहर में 104 नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। साथ ही जर्जर तार और बिजली के खंभे बदले जाएंगे। गोरखपुर में इस काम को करने की जिम्मेदारी रिलायंस कंपनी को दी गई है। जून तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
- आरआर सिंह, अधीक्षण अभियंता, बिजली विभाग