गोरखपुर यूनिवर्सिटी का छात्रसंघ चुनाव प्रस्तावित तिथि 16 सितंबर को नहीं होगा। पुलिस और प्रशासन ने चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराने को लेकर असमर्थता जाहिर कर दी है। चुनाव अब सितंबर के आखिरी सप्ताह में हो सकता है। अंतिम निर्णय सात सितंबर को यूनिवर्सिटी की चुनाव समिति बैठक करेगी।
चुनाव को लेकर मंगलवार को एसएसपी रामलाल वर्मा के साथ चुनाव अधिकारी प्रो. संजय बैजल की बैठक हुई। इसमें एसएसपी ने बकरीद और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कार्यक्रम को लेकर 16 सितंबर को चुनाव कराने में असहमति जाहिर कर दी। एसएसपी ने कहा कि 20 से 30 सितंबर के बीच चुनाव की तिथि तय करें। चुनाव अधिकारी प्रो. बैजल का कहना है कि 25 सितंबर को यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह होना है। उन्होंने अक्टूबर के पहले सप्ताह में चुनाव कराने का प्रस्ताव प्रशासन के सामने रखा था। इस पर एसएसपी ने नवरात्र का हवाला देते हुए इस तिथि पर चुनाव कराने से इंकार कर दिया।
चुनाव अधिकारी का तर्क था कि चुनाव की प्रक्रिया के लिए कम से कम सप्ताह भर का समय लगेगा। काफी मंथन के बाद भी प्रस्तावित तारीख पर सहमति नहीं बन पाई। बुधवार को इस पर दोबारा विचार विमर्श कर फैसला लिया जाएगा। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने मुश्किल यह है कि सत्र प्रारंभ होने के आठ हफ्तों के अंदर चुनाव कराना है। 16 सितंबर के बाद यह अवधि पूरी हो जाएगी। ऐसे में दस सालों बाद हो रहे चुनाव पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने होर्डिंग्स की कराई वीडियोग्राफी
गोरखपुर यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव को लेकर चुनाव अधिकारी ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है। मंगलवार को प्रमुख चौराहों पर लगे होर्डिंग्स की वीडियोग्राफी कराई गई। उधर, कैंपस में नारेबाजी और प्रचार से पढ़ाई बाधित होने लगी है। छात्रसंघ चुनाव घोषित होने के बाद यूनिवर्सिटी में गहमागहमी बढ़ गई है। छात्रनेताओं ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है। हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन चुनाव को लिंगदोह समिति के नियमों से कराने पर तुला है, जबकि चुनाव प्रचार में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शहर के मुख्य चौराहों पर प्रत्याशियों के बड़े-बड़े हॉर्डिंग्स लगा दिए गए हैं।
यूनिवर्सिटी में प्रत्याशी बाहरी तत्वों को लेकर घूम रहे हैं और हैंडबिल बांटे जा रहे हैं। मंगलवार को कुछ शिक्षकों ने इसकी शिकायत चुनाव अधिकारी से की है। हालांकि चीफ प्राक्टर प्रो. सतीश चंद पांडेय ने मेन गेट पर परिचय पत्र और फीस की रसीद की जांच कराई, लेकिन दूसरे रास्तों से कुछ बाहरी लोग कैंपस में घुस गए। चुनाव अधिकारी का कहना है कि उन्होंने प्रचार की नियम विरुद्ध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए प्रत्याशियों को 24 घंटे का समय दिया था। मंगलवार को यह समय खत्म हो गया और इसके बाद उन्होंने वीडियोग्राफी कराई है। चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने से रोक दिया जाएगा।
पवन अंबेडकरवादी छात्रसभा से महामंत्री के प्रत्याशी
अंबेडकरवादी छात्रसभा ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में पवन कुमार को महामंत्री का प्रत्याशी बनाया है। प्रदेश अध्यक्ष अमर पासवान के नेतृत्व में प्रचार-प्रसार के लिए गए छात्रों ने जमकर नारेबाजी की और पदयात्रा निकाला।