इस बार के आम बजट से हर किसी को कुछ बेहतर मिलने की अपेक्षा है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां झेल रहे लोगों की जहां बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधाओं की दरकार है वहीं डॉक्टरों की नजर में यह देशवासियों की सबसे बड़ी जरूरत है।
दवाओं पर नियंत्रण की जरूरत
जितनी भी जीवनरक्षक दवाएं हैं उनके दाम सरकार के नियंत्रण में होने चाहिए। हालांकि कई दवाओं के दाम कम किए गए हैं मगर इस पर नियंत्रण बेहद जरूरी है। देश में अभी और उच्च क्वालिटी के मेडिकल कॉलेज की जरूरत है। हालांकि इस दिशा में सरकार प्रयास करती नजर आ रही है। इससे डॉक्टरों की कमी दूर की जा सकती है। बजट में विकास को एजेंडे को प्रमुखता से शामिल करना चाहिए। इन सबके बीच देश को शक्तिशाली बनाने की ओर भी ध्यान देने की जरूरत है। यूनिवर्सिटी में मौलिक रिसर्च की व्यवस्था होनी चाहिए। चूंकि अब भी कोई यूनिवर्सिटी टॉप लिस्ट में नहीं है।
- डॉ. आरकेसी मिश्रा, वरिष्ठ फिजीशियन
डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाए
आज के समय में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हर घर की कहानी है। सभी को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिस रफ्तार से जनसंख्या बढ़ रही है, उस अनुपात में डॉक्टरों की संख्या नहीं बढ़ रही। हालांकि सरकार चिकित्सा क्षेत्र पर ध्यान तो दे रही हैं मगर डॉक्टरों की संख्या आज भी बेहद कम है। डब्लूएचओ के मानक को देखा जाए तो अब भी देश बहुत पीछे है। इस ओर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। ज्यादा से ज्यादा मेडिकल कॉलेज खुलें तभी डॉक्टरों की कमी दूर की जा सकती है। इसे प्राथमिकता में शामिल करना होगा। दूसरे आम आदमी को महंगाई से राहत देने के लिए भी विचार करना चाहिए। इनकम टैक्स का दायरा बढ़ाना चाहिए और आम आदमी को व्यापार या रोजगार के क्षेत्र में कैसे लाया जाए, इस मुद्दे पर भी सरकार को कुछ बेहतर करना चाहिए।
- डॉ. शिवशंकर शाही, वरिष्ठ सर्जन
एक्सपर्ट कमेंट
विकास और रोजगार आधारित बजट होना चाहिए
आगामी बजट यह प्रदर्शित करेगा कि सरकार किस दिशा में बढ़ना चाह रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालातों को देखते हुए बजट का न सिर्फ विकासोन्मुखी बल्कि रोजगार सृजन करने वाला होना जरूरी है। इसके लिए लोगों के पॉकेटों में पैसा देना जरूरी है। कृषि पर विशेष ध्यान देकर ऐसा किया जा सकता है। जब तक ग्रामीण जीवन बेहतर नहीं होगा तब कि मांग पैदा नहीं होगी। मांग पैदा होगी तो इसका सीधा प्रभाव औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ेगा और अंततोगत्वा नए-नए रोजगार सृजित होंगे। फिर मांग और आपूर्ति की कड़ी बनती चली जाएगी और देश की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ेगी। आज सबसे ज्यादा सर्विस सेक्टर पर ध्यान दिया जा रहा है। विदेशों में इसका दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है। इस लिए सरकार को कृषि सेक्टर को मजबूती के लिए विशेष प्रावधान करना चाहिए। वहीं सामाजिक दायित्व को ध्यान में रखते हुए सरकार को स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष ध्यान देना चाहिए। आम आदमी को इसका फायदा मिले, इसके लिए नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएं, दवाओं के दामों पर काबू किया जाए।
- एचएस बाजपेयी, शिक्षक (वाणिज्य), गोरखपुर विश्वविद्यालय