सीएम योगी आदित्यनाथ ने सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर सख्त आदेश भले ही दे दिया है लेकिन उनके गृह जनपद में डॉक्टरों पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। सरकारी डॉक्टर धड़ल्ले से अपने आवास पर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। अमर उजाला ने लगातार दो दिन ऐसे ही दो डॉक्टरों के यहां पड़ताल की। पड़ताल में आदेश को ठेंगा दिखाने वाले सच से सामना हुआ।
केस-1
गुरुवार शाम पांच बजे, दाउदपुर काली मंदिर के बगल वाली गली, यहां मेडिकल कॉलेज के न्यूरो विभाग के विभागाध्यक्ष रहते हैं। डॉक्टर विजय शंकर मौर्य अपने निजी आवास पर ही मरीजों की ओपीडी चलाते हैं। ओपीडी में आने वाले मरीजों को पहले ही 400 रुपये फीस जमा करना पड़ता है। यहां शाम छह बजे कुछ मरीज डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच सवा छह बजे डॉक्टर अपनी केबिन में आते हैं। थोड़ी देर बाद ही बाहर बैठा मरीज अंदर जाता है लेकिन फीस जमा नहीं होेने पर वापस कमरे से बाहर कर दिया गया। पूछने पर बताया कि सरकारी आदेश के बाद लगा कि डॉक्टर साहब अब घर पर इलाज नहीं करेंगे इसलिए रुपये साथ नहीं लाया था। थोड़ी देर बाद ही एक और परिवार आया और फीस जमा कर सीधा कमरे के अंदर चला गया। कमरे के अंदर ही मरीज का इलाज करते वक्त डॉक्टर कैमरे में कैद हो गए।
केस-2
शुक्रवार सुबह सात बजे, मेडिकल कॉलेज कैंपस में स्थित सरकारी आवास, यहां मेडिकल कॉलेज ईएनटी विभागाध्यक्ष का सरकारी आवास है। मेडिकल कॉलेज सूत्रों के मुताबिक डॉक्टर यहां रोज सुबह 10 बजे तक निजी ओपीडी चलाते हैं। इसके बदले मरीजों से 400 रुपये फीस भी जमा करवाया जाता है। इसके लिए बाकायदा घर के बाहर एक कंपाउंडर भी बैठता है। शुक्रवार को भी मरीज इलाज कराने यहां पहुंचे थे। शुक्रवार को नजारा कुछ बदला-बदला सा नजर आया। रोज की तरह मरीजों की लंबी लाइन तो नहीं थी लेकिन इक्का-दुक्का मरीज बारी-बारी यहां आ रहे थे।
चारों तरफ फैला है रैकेट
मेडिकल कॉलेज ही नहीं शहर में और भी इलाकों में सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस करते हैं। मेडिकल कॉलेज रोड पर मेडिकल कॉलेज के ही डॉक्टर बाकायदा निजी क्लिीनिक खोल कर बैठें मिल जाएंगे। वहीं शहर के कई चर्चित अस्पताल हैं, जहां सरकारी डॉक्टर आते हैं और अपनी सेवा के बदले मोटी रकम की कमाई करते हैं। शहर के बीचोंबीच ही कुछ सरकारी डॉक्टर शाम के बाद आपने आवास पर ही मरीजों का इलाज करते हैं।
निजी प्रैक्टिस में हैं ज्यादा लाभ
जानकारों की मानें तो सरकारी जूनियर डॉक्टर की महीने की सैलरी सातवें वेतन आयोग के बाद साठ हजार के आसपास से शुरू होती है। (बढ़ते ग्रेड के आधार पर सैलरी में भी इजाफा होता रहता है।) जबकि निजी प्रैक्टिस में अगर रोज कम से कम पांच मरीज को ओपीडी में भी देखते हैं तो उनकी कमाई महीने की डेढ़ से दो लाख रुपये के बीच हो जाती है। इसी मोह में ही सरकारी डॉक्टर सरकारी अस्पतालों से भी मरीजों को अपने निजी अस्पताल में आने की सलाह देते हैं।