लैब टेक्नीशियन स्थानांतरण मामला: ‘तबादला आदेश निरस्त किया जाना सीएमओ के अधिकारों का हनन’
गोरखपुर। जंगल कौड़िया और कौड़ीराम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लैब टेक्नीशियन के स्थानांतरण के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के आदेश को निरस्त किए जाने को प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के पदाधिकारी सीएमओ के अधिकारों का हनन मान रहे हैं। उनके अनुसार बिना अधिकार के सीएमओ जिले की स्वास्थ्य सेवाएं संचालित नहीं कर पाएंगे। पदाधिकारियों का कहना है कि सीएमओ के आदेश को 2015 में महानिदेशक स्वास्थ्य की ओर से जारी एक पत्र के आधार पर निरस्त किया गया न कि किसी शासनादेश के। पत्र किसी खास संदर्भ में जारी किया जाता है जबकि शासनादेश पूरे विभाग पर लागू होता है।
प्रॉविंशियल मेडिकल सर्विसेज के जिला इकाई प्रधान डॉ. अशोक कुमार सिंह के अनुसार सीएमओ जिले में स्वास्थ्य विभाग के सर्वोच्च अधिकारी हैं। बेहतर व्यवस्था के लिए उन्हें किसी भी मातहत को जिले में स्थानांतरित करने का अधिकार है। सीएमओ ने प्राथमिक स्वास्थ्य केेंद्र पीएचसी जंगल कौड़िया और पीएचसी कौड़ीराम के लैब टेक्नीशियनों को जांच में दोषी पाए जाने के बाद स्थानांतरित किया था। इस आदेश को महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा निरस्त किए जाने से व्यवस्था का प्रश्न खड़ा हो गया है। यदि सीएमओ के स्थानांतरण के अधिकार समाप्त कर दिए जाएंगे तो स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करना मुश्किल होगा। डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि एसोसिएशन की केंद्रीय इकाई के पदाधिकारी सोमवार को डीजी हेल्थ से मिल कर निरस्तीकरण का आदेश वापस करने और दोषी लैब टेक्नीशियन के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करेंगे।
चार साल पहले जारी चिट्ठी को निर्णय का आधार बनाना गलत
डॉ. अशोक कुमार सिंह के अनुसार सीएमओ के आदेश को निरस्त करने का आधार 2015 में महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं की ओर से जारी की गई चिट्ठी को बनाया गया है। चिट्ठी में उल्लिखित था कि सीएमओ लैब टेक्नीशियन और पैरा मेडिकल संवर्ग के कर्मचारियों को स्थानांतरण नहीं कर सकेंगे, इसके लिए वह महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं को सिफारिशी पत्र भेजेंगे। उनका दावा है कि यह चिट्ठी किसी खास संदर्भ के लिए जारी की गई थी। सीएमओ के इन अधिकार पर प्रतिबंध लगाने वाला कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है।
सोशल मीडिया पर डाली आपत्तिजनक सामग्री
पीएमएसए के पदाधिकारियों का आरोप है कि एक लैब टेक्नीशियन ने सरकारी अधिकारियों और सेवाओं के बारे में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अभद्र सामग्री पोस्ट की है। यह सरकारी नियमावली का उल्लंघन है। सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक पोस्ट व अन्य सामग्री की प्रतियों सहित अन्य दस्तावेज भी महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं के समक्ष पेश किए जाएंगे।