एक याचिका के संबंध में अर्बन सीलिंग से जुड़ी जिन मूल फाइलों के साथ हाईकोर्ट ने डीएम के. विजयेंद्र पांडियन को शनिवार को कोर्ट में तलब किया है वे मूल फाइलें ही कलेक्ट्रेट से गायब हो गईं हैं।
जांच में इसकी पुष्टि होने पर जिला प्रशासन ने 2005 में तैनात तत्कालीन शासकीय अधिवक्ता समेत कलेक्ट्रेट के चार कर्मचारियों के खिलाफ कैंट थाने में चोरी व विश्वास का आपराधिक हनन की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।
विधिक राय लेने के बाद शुक्रवार की शाम एक तरफ जहां मुक दमा दर्ज करने की कार्रवाई की गई तो, वहीं दूसरी तरफ डीएम हाईकोर्ट के लिए रवाना हुए। शनिवार को संबंधित याचिका में सुनवाई होनी है।
मामले में जिन पर एफआईआर दर्ज हुई है, उनमें अर्बन सीलिंग कार्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारी भूपेंद्र सहाय, सेवानिवृत्त नोडल अधिकारी पीयूष पांडेय, अर्बन सीलिंग कार्यालय में तत्कालीन टाईपिस्ट व पेशकार बच्छलाल, तत्कालीन जिला शासकीय अधिवक्ता समरजीत सिंह समेत कई अज्ञात शामिल हैं।
अर्बन सीलिंग के कनिष्ठ सहायक चंदन श्रीवास्तव की तरफ से दी गई तहरीर के मुताबिक सीलिंग की जमीन से जुड़ी एक याचिका विजय नाथ यादव व अन्य बनाम उप्र राज्य व अन्य से संबंधित मूल रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
छानबीन में रिकॉर्ड नहीं मिले। इस संबंध में डीएम ने एडीएम (प्रशासन), एसडीएम सदर व ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर मामले की जांच सौंपी थी। जांच में पूर्व शासकीय अधिवक्ता समेत संबंधित चार कर्मचारी दोषी पाए गए। जिन पर मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।
शासकीय अधिवक्ता ले गए फाइल, लौटाया नहीं
जिला प्रशासन की तरफ से पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक तत्कालीन शासकीय अधिवक्ता समरजीत सिंह द्वारा अर्बन सीलिंग कार्यालय में उपलब्ध 27 अगस्त 2005 की प्राप्ति रसीद द्वारा संबंधित पत्रावली अपने पास होने का उल्लेख किया गया है। मगर उक्त पत्रावली को वापस करने का कोई साक्ष्य समरजीत सिंह की ओर से नहीं दिया गया है।
बशारतपुर की बेशकीमती जमीन का है मामला
जिस मामले में हाईकोर्ट ने मूल फाइलें तलब की है, वह बशारतपुर की बेशकीमती जमीन से जुड़ा है। प्रशासन इसे सीलिंग की जमीन मानता है जबकि याचिकाकर्ता अपना दावा कर रहे हैं। एडीएम सिटी राकेश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक 11 हजार वर्ग मीटर से जुड़ी इस जमीन को लेकर 2008 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इसपर अब कोर्ट डीएम से मामले से जुड़ी मूल फाइलें मांगी हैं। वर्तमान में इस जमीन की कीमत करोड़ों में हैं।
विजय नाथ यादव की तरफ से दाखिल याचिका में हाईकोर्ट ने जमीन से जुड़ी मूल फाइलें मांगी थी। छानबीन के दौरान फाइलें गायब मिली। जांच के दौरान प्रथमदृष्टया कर्मचारियों और 2005 में तैनात शासकीय अधिवक्ता की लापरवाही सामने आई है, जिसपर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। मामले की विस्तृत जांच चल रही है। अगर कोई और भी दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- राकेश कुमार श्रीवास्तव, एडीएम (सिटी)
तीन दिनों से कलेक्ट्रेट-सदर तहसील में मचा है हड़कंप
सीलिंग की जमीन से जुड़ी मूल फाइल ही गायब होने को लेकर पिछले तीन दिनों से कलेक्ट्रेट व सदर तहसील के अफसरों-कर्मचारियों में हड़कंप मची हुई है। गुरुवार को अफसरों, के साथ ही कई राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों से इस संबंध में राय मशविरा लिया गया। सूत्रों के मुताबिक फाइलें गायब होने की पुष्टि जल्द ही जिला प्रशासन को हुई थी जिसके बाद कई आला अफसरों के हाथ-पांव फूल गए।